यूँँ तो समेट लाई थी हर चीज़ गाँव से धागे तुम्हारे नाम के बरगद पे रह गए
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं दिन में सौ बार याद करता हूँ पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
Aadil Rasheed
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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तुझ को पाकर भी कुछ नहीं पाया तेरे हो के भी बे-सहारे हैं
Binte Reshma
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हार जाने पे लोग कहते हैं कौन झगड़ा करे मुक़द्दर से
Binte Reshma
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ये दर्द के टुकड़े हैँ अश'आर नहीं अज़रा हम लफ़्ज़ों के धागों में ज़ख़्मों को पिरोते हैँ
Binte Reshma
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अब लग चुकी है दर्द के मौसम की लत मुझे अब देर हो चुकी है बहुत रोक मत मुझे
Binte Reshma
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आँखों को अब समझाना होगा ख़्वाबों की तकमील नहीं होती
Binte Reshma
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