zaati milkiyat ka junoon insaaniyat ko tabaahi ke ghaar mein dhakel kar rahega.
Related Sher
बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता
Afzal Khan
37 likes
ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह
Sudarshan Fakir
39 likes
कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में
Firaq Gorakhpuri
23 likes
एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए
Ibn E Insha
19 likes
चंद मख़्सूस दरख़्तों से मुहब्बत का जुनून कुछ परिंदों को कहीं का नहीं रहने देता
divya 'sabaa'
4 likes
More from Hajra Masroor
ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
0 likes
ज़िंदगी भर यूँँ मेरे दिल को दुखाया था बहुत क़ब्र पर आया है वो मुझ से मुआ'फ़ी के लिए
0 likes
ज़िंदगी भर मैं बोलूँगा तुझ को इश्क़ का यूँँ दग़ाबाज़ है तू
0 likes
वो दर्द भला क्या समझेंगे जो दर्द हमेशा देते हैं
0 likes
वो जाने वाला तो मेरी दुनिया ही जैसे ले गया और लोग कहते हैं कि ख़ाली हाथ जाते हैं सभी
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Hajra Masroor.
Similar Moods
More moods that pair well with Hajra Masroor's sher.







