ज़हीन तो नहीं हैं हम, मगर ज़माने में कहाँ पे, किस से है क्या, बोलना समझते हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हार कर ख़ुद-कुशी जो करते हैं उन सेे कहना अच्छा होता नहीं माँ-बाप को बेवा करना
Mohammad Aquib Khan
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ये बात और है कभी मातम नहीं किया लेकिन तुम्हारे हिज्र का ग़म कम नहीं किया इक दर्द सा ही बनके मेरे साथ तू रहे कुछ इस लिए भी ज़ख़्मों पे मरहम नहीं किया
Mohammad Aquib Khan
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कैसे कहें के ज़ीस्त में अव्वल है शा'इरी अब तक हमारे हाथ ही रोटी कमाते हैं
Mohammad Aquib Khan
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ज़ालिम से डरने वालों ज़रा याद तो करो थी सैंकड़ो की फ़ौज बहत्तर के सामने
Mohammad Aquib Khan
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दो गज़ जमीँ, सफ़ेद कफ़न, बदहवा से लाश मौत आई और ज़िन्दगी का दाम दे गई
Mohammad Aquib Khan
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