ज़ख़्म बस भरने ही वाले थे मेरे एक ख़त फिर मिल गया उस का मुझे
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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दिल-परिन्दा क़फ़स में ख़ुश है अब आसमाँ बोझ लग रहा था इसे
Yuvraj Singh Faujdar
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ये इश्क़ का जो खेल है रस्सा-कशी का खेल है जितने भी गिरने वाले हैं सब जीते माने जाते हैं
Yuvraj Singh Faujdar
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उसे अपना बनाने में ये दिक़्क़त है मेरी ग़ज़लें ये जादू कर न पाएँगी
Yuvraj Singh Faujdar
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बस एक ही अफ़सोस पूरी ज़िंदगी होगा मुझे आवारगी में वक़्त ज़ाया' कर नहीं पाया मेरा
Yuvraj Singh Faujdar
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पत्थर तोड़ा करते थे जो हाथ उन में भी अब इश्क़ के छाले हैं
Yuvraj Singh Faujdar
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