ज़ख़्म भी लगाते हो फूल भी खिलाते हो कितने काम लेते हो एक मुस्कुराने से
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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लिख के उँगली से धूल पे कोई ख़ुद हँसा अपनी भूल पे कोई याद कर के किसी के चेहरे को रख गया होंठ फूल पे कोई
Sandeep Thakur
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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महीनों फूल भिजवाने पड़े थे वो पहली बार जब रूठा था मुझ से
Varun Anand
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ज़ब्त से चूर हो गया होगा ग़म से मामूर हो गया होगा बज़्म-ए-अहबाब छोड़ने वाला कितना मजबूर हो गया होगा
Nusrat Siddiqui
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किस ज़रूरत को दबाऊँ किसे पूरा कर लूँ अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैं ने
Nusrat Siddiqui
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अपने हाथों की लकीरें न बदलने पाई ख़ुश-नसीबों से बहुत हाथ मिलाए मैं ने
Nusrat Siddiqui
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