अपने हाथों की लकीरें न बदलने पाई ख़ुश-नसीबों से बहुत हाथ मिलाए मैं ने
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मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है
Bashir Badr
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उस के हाथों में बस हम ही जँचते थे दावा सोने का कंगन भी करता था
Vishal Bagh
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सादा हूँ और ब्रैंड्स पसंद नहीं मुझ को मुझ पर अपने पैसे ज़ाया' मत करना
Ali Zaryoun
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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है
Azhar Iqbal
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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किस ज़रूरत को दबाऊँ किसे पूरा कर लूँ अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैं ने
Nusrat Siddiqui
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ज़ख़्म भी लगाते हो फूल भी खिलाते हो कितने काम लेते हो एक मुस्कुराने से
Nusrat Siddiqui
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ज़ब्त से चूर हो गया होगा ग़म से मामूर हो गया होगा बज़्म-ए-अहबाब छोड़ने वाला कितना मजबूर हो गया होगा
Nusrat Siddiqui
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