ज़ख़्म सीने पर दिए जो याद हम को आज भी बुज़दिलों के कारना में भूल कैसे जाए हम
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं पानियों से पत्थरों पर वार कर के
nakul kumar
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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अक्सर ही ज़ख़्म इश्क़ में पाले हैं औरतें पर कितने टूटे मर्द सँभाले हैं औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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उस को सुनता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे कोई चिड़िया चहका करती है
Ravi 'VEER'
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ज़मीं पर आप हो तो कौन चाहे बिना मतलब उड़ानें आसमाँ की
Ravi 'VEER'
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जिस तरह पत्ते गिरे है शाख़ से ठीक वैसे ही गिरा हूँ यार मैं नासमझ था मैं बहुत पहले मगर अब बहुत ही सरफिरा हूँ यार मैं
Ravi 'VEER'
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चार दिन की ज़िंदगी जिस में यहाँ रह गए हैं दो ही दिन मेरे लिए
Ravi 'VEER'
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शा'इरी ये हुस्न और ये इश्क़ की बातें जनाब इक समय तक ठीक है फिर छोड़ देनी चाहिए
Ravi 'VEER'
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