ज़माने में वही फिर से नई इक ईद आई है मिलेंगे लोग सारे फिर यहाँ झूठी तसल्ली से
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ज़माने से उलझना छोड़ दो ऐ हिंद के लोगों हमारा काम तो बस मुल्क को आगे बढ़ाना है
Faizan Faizi
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मुझे भी बा'द मरने के ख़ुदा जन्नत में डालेगा दुआएँ हैं मिरी हमराह मेरे दोस्त भी जाएँ
Faizan Faizi
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नए लोगों में बैठो यार लेकिन बुरे इंसान में दिखना नहीं तुम तुम्हें भी मार डालेगी ये दुनिया हुकूमत पर कभी लिखना नहीं तुम
Faizan Faizi
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मिलना बिछड़ना काम तो होता रहेगा दोस्त अब जब साथ हैं सब, कुछ नई तस्वीर तो यूँंँ ही बना
Faizan Faizi
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लगता है मुझे वज्द में आना पड़ेगा बारिशे होंगी तो भीग जाना पड़ेगा
Faizan Faizi
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