ज़मीं की बात और न आसमाँ की बात करते हैं जहाँ हमारी फ़िक्र है वहाँ की बात करते हैं जहाँ गरीब को मिले न रोटी एक वक़्त की चलो अमीर ज़ादों हम वहाँ की बात करते हैं
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शे'र होंटों पे रक़्स करते हैं हो अगर कोई हादसा मुझ में
Dard Faiz Khan
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पानी भी है, माहौल भी है, और हवा भी क्या बात कि सर सब्ज़ शजर सूख रहा है
Dard Faiz Khan
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उन की औक़ात से बाहर वो नज़र आता है जिन के शे'रों में हुआ करता है गहराई का माल ऐसे लोगों पे निगाहें मैं सदा रखता हूँ जिन की जेबों में भरा रहता है सप्लाई का माल
Dard Faiz Khan
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नींद आती नहीं है फ़ुर्क़त में मेरी पलकें झुलस गई यारो
Dard Faiz Khan
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एक लम्हे को गुज़रने में लगी हैं सदियाँ जब किसी क़ैस को लैला से जुदा होना पड़ा
Dard Faiz Khan
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