उन की औक़ात से बाहर वो नज़र आता है जिन के शे'रों में हुआ करता है गहराई का माल ऐसे लोगों पे निगाहें मैं सदा रखता हूँ जिन की जेबों में भरा रहता है सप्लाई का माल
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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ज़मीं की बात और न आसमाँ की बात करते हैं जहाँ हमारी फ़िक्र है वहाँ की बात करते हैं जहाँ गरीब को मिले न रोटी एक वक़्त की चलो अमीर ज़ादों हम वहाँ की बात करते हैं
Dard Faiz Khan
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शे'र होंटों पे रक़्स करते हैं हो अगर कोई हादसा मुझ में
Dard Faiz Khan
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नींद आती नहीं है फ़ुर्क़त में मेरी पलकें झुलस गई यारो
Dard Faiz Khan
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पानी भी है, माहौल भी है, और हवा भी क्या बात कि सर सब्ज़ शजर सूख रहा है
Dard Faiz Khan
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जान-ए-मन तुम वबाल करती हो लाल में भी कमाल करती हो जब पहन लेती लाल जोड़ा तुम फिर तो जीना मुहाल करती हो
Dard Faiz Khan
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