पानी भी है, माहौल भी है, और हवा भी क्या बात कि सर सब्ज़ शजर सूख रहा है
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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जान-ए-मन तुम वबाल करती हो लाल में भी कमाल करती हो जब पहन लेती लाल जोड़ा तुम फिर तो जीना मुहाल करती हो
Dard Faiz Khan
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ज़मीं की बात और न आसमाँ की बात करते हैं जहाँ हमारी फ़िक्र है वहाँ की बात करते हैं जहाँ गरीब को मिले न रोटी एक वक़्त की चलो अमीर ज़ादों हम वहाँ की बात करते हैं
Dard Faiz Khan
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उन की औक़ात से बाहर वो नज़र आता है जिन के शे'रों में हुआ करता है गहराई का माल ऐसे लोगों पे निगाहें मैं सदा रखता हूँ जिन की जेबों में भरा रहता है सप्लाई का माल
Dard Faiz Khan
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नींद आती नहीं है फ़ुर्क़त में मेरी पलकें झुलस गई यारो
Dard Faiz Khan
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शे'र होंटों पे रक़्स करते हैं हो अगर कोई हादसा मुझ में
Dard Faiz Khan
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