ज़रा ज़रा सी बात पे यूँ इल्तेफात रखोगे बताओं कैसे उम्र भर का तालुकात रखोगे
Related Sher
ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
173 likes
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
149 likes
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
133 likes
तुझे न आएँगी मुफ़्लिस की मुश्किलात समझ मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूँ बात समझ
Umair Najmi
99 likes
इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
124 likes
More from Ali Mohammed Shaikh
सामने वो नज़र के रहे इस लिए उस की बस्ती में ही काम पर लग गए वो तो आया नहीं हाथ मेरे मगर हाथ इस के बहाने हुनर लग गए
Ali Mohammed Shaikh
0 likes
मेरी नज़रे उठी उठी, तेरी नज़रें झूकी झुकी तोल रहे हैं प्यार को जैसे दो पैमानों में
Ali Mohammed Shaikh
0 likes
होता है दर्द क़ल्ब के नज़दीक सुना था तुम से मिले तो पुख़्ता हुआ ठीक सुना था
Ali Mohammed Shaikh
0 likes
ऐसे शगुफ़्ता रंग गुज़िश्ता कभी न था मैं फूल था मगर तेरे दर का कभी न था इतना तेरे दयार से मुझ को अता हुआ इतना नसीब ने मेरे सोचा कभी न था
Ali Mohammed Shaikh
0 likes
इक तिरा दिल रखने में कितने ख़सारे हो गए जो भी थे बैअत में मेरे सब किनारे हो गए
Ali Mohammed Shaikh
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ali Mohammed Shaikh.
Similar Moods
More moods that pair well with Ali Mohammed Shaikh's sher.







