sherKuch Alfaaz

ज़रूरी है ज़माना भी ख़फ़ा हो हमें तो अब बदलना है ज़रूरी

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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या

Abrar Kashif

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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं

Jaun Elia

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दफ़्तर में तय किया था कि तारे गिनेंगे आज लेकिन हमें पहुँचते ही घर नींद आ गई

Balmohan Pandey

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आज मिलना था बिछड़ जाने की निय्यत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना तेज़ है

Tehzeeb Hafi

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