ज़िंदगी की तन्हाई है और फिर न कटते दिन ये गिने तो दुश्वारी गुज़ारना भी दुश्वारी
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मिरे ख़िलाफ़ ही सब दस्तख़त हुए आख़िर मैं चुप रहा तो गुनहगार मुझ को माना है
arjun chamoli
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भुला के छोड़ दिया उस गली में चलना भी कि दाग़ लगने न पाए किसी के दामन पर
arjun chamoli
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तड़प के रोए हैं चेहरा अगर छुपाया है कि लोग देख न ले आँख में समुंदर को
arjun chamoli
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दर्पण दिखा दिया तो बुरा मान बैठे वो सच बोलने पे दोस्त भी दुश्मन से हो गए
arjun chamoli
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तिरी मासूमियत बर्बाद कर देगी मुझे इक दिन बिना काँटों भरी राहें सभी आसाँ समझते हैं
arjun chamoli
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