ज़िंदगी मेरी मुझे क़ैद किए देती है इस को डर है मैं किसी और का हो सकता हूँ
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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मैं ने इक शहर हमेशा के लिए छोड़ दिया लेकिन उस शहर को आँखों में बसा लाया हूँ
Azm Shakri
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मेरे जिस्म से वक़्त ने कपड़े नोच लिए मंज़र मंज़र ख़ुद मेरी पोशाक हुआ
Azm Shakri
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अगर साए से जल जाने का इतना ख़ौफ़ था तो फिर सहर होते ही सूरज की निगहबानी में आ जाते
Azm Shakri
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सारे दुख सो जाएँगे लेकिन इक ऐसा ग़म भी है जो मिरे बिस्तर पे सदियों का सफ़र रख जाएगा
Azm Shakri
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ये जो दीवार अँधेरों ने उठा रक्खी है मेरा मक़्सद इसी दीवार में दर करना है
Azm Shakri
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