जो आला-ज़र्फ़ होते हैं हमेशा झुक के मिलते हैं सुराही सर-निगूँ हो कर भरा करती है पैमाना
Top 20 Sher Series
Shayari of Haider Ali Aatish
Shayari of Haider Ali Aatish ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.
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Series se pehle kuch standout sher padhein.
न गोर-ए-सिकंदर न है क़ब्र-ए-दारा मिटे नामियों के निशाँ कैसे कैसे
बुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइए दिल को न तोड़िए ये ख़ुदा का मक़ाम है
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या कहती है तुझ को ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ाएबाना क्या
हर शब शब-ए-बरात है हर रोज़ रोज़-ए-ईद सोता हूँ हाथ गर्दन-ए-मीना में डाल के
सफ़र है शर्त मुसाफ़िर-नवाज़ बहुतेरे हज़ार-हा शजर-ए-साया-दार राह में है
फ़स्ल-ए-बहार आई पियो सूफ़ियो शराब बस हो चुकी नमाज़ मुसल्ला उठाइए
दोस्तों से इस क़दर सदमे उठाए जान पर दिल से दुश्मन की अदावत का गिला जाता रहा
लगे मुँह भी चिढ़ाने देते देते गालियाँ साहब ज़बाँ बिगड़ी तो बिगड़ी थी ख़बर लीजे दहन बिगड़ा
बंदिश-ए-अल्फ़ाज़ जड़ने से नगों के कम नहीं शाइ'री भी काम है 'आतिश' मुरस्सा-साज़ का
न पूछ हाल मिरा चोब-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ लगा के आग मुझे कारवाँ रवाना हुआ
रख के मुँह सो गए हम आतिशीं रुख़्सारों पर दिल को था चैन तो नींद आ गई अँगारों पर
आफ़त-ए-जाँ हुई उस रू-ए-किताबी की याद रास आया न मुझे हाफ़िज़-ए-क़ुरआँ होना
क़ैद-ए-मज़हब की गिरफ़्तारी से छुट जाता है हो न दीवाना तो है अक़्ल से इंसाँ ख़ाली
जो आला-ज़र्फ़ होते हैं हमेशा झुक के मिलते हैं सुराही सर-निगूँ हो कर भरा करती है पैमाना
न गोर-ए-सिकंदर न है क़ब्र-ए-दारा मिटे नामियों के निशाँ कैसे कैसे
बुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइए दिल को न तोड़िए ये ख़ुदा का मक़ाम है
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या कहती है तुझ को ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ाएबाना क्या
हर शब शब-ए-बरात है हर रोज़ रोज़-ए-ईद सोता हूँ हाथ गर्दन-ए-मीना में डाल के
सफ़र है शर्त मुसाफ़िर-नवाज़ बहुतेरे हज़ार-हा शजर-ए-साया-दार राह में है
फ़स्ल-ए-बहार आई पियो सूफ़ियो शराब बस हो चुकी नमाज़ मुसल्ला उठाइए
दोस्तों से इस क़दर सदमे उठाए जान पर दिल से दुश्मन की अदावत का गिला जाता रहा
लगे मुँह भी चिढ़ाने देते देते गालियाँ साहब ज़बाँ बिगड़ी तो बिगड़ी थी ख़बर लीजे दहन बिगड़ा
बंदिश-ए-अल्फ़ाज़ जड़ने से नगों के कम नहीं शाइ'री भी काम है 'आतिश' मुरस्सा-साज़ का
न पूछ हाल मिरा चोब-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ लगा के आग मुझे कारवाँ रवाना हुआ
रख के मुँह सो गए हम आतिशीं रुख़्सारों पर दिल को था चैन तो नींद आ गई अँगारों पर
आफ़त-ए-जाँ हुई उस रू-ए-किताबी की याद रास आया न मुझे हाफ़िज़-ए-क़ुरआँ होना
क़ैद-ए-मज़हब की गिरफ़्तारी से छुट जाता है हो न दीवाना तो है अक़्ल से इंसाँ ख़ाली
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Shayari of Haider Ali Aatish FAQs
Haidar Ali Aatish Top 20 me kya milega?
Haidar Ali Aatish ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.
Kya is page ki links internal hain?
Haan, collection links, writer links aur detail links sab Kuch Alfaaz ke internal routes par map kiye gaye hain.
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