Top 20 Sher Series

Shayari of Meer Hasan

Shayari of Meer Hasan ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.

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Series se pehle kuch standout sher padhein.

सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं

दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था

आसाँ न समझियो तुम नख़वत से पाक होना इक उम्र खो के हम ने सीखा है ख़ाक होना

आश्ना बेवफ़ा नहीं होता बेवफ़ा आश्ना नहीं होता

ग़ैर को तुम न आँख भर देखो क्या ग़ज़ब करते हो इधर देखो

जान-ओ-दिल हैं उदास से मेरे उठ गया कौन पास से मेरे

इज़हार-ए-ख़मोशी में है सौ तरह की फ़रियाद ज़ाहिर का ये पर्दा है कि मैं कुछ नहीं कहता

क़िस्मत ने दूर ऐसा ही फेंका हमें कि हम फिर जीते-जी पहुँच न सके अपने यार तक

वस्ल होता है जिन को दुनिया में यारब ऐसे भी लोग होते हैं

हम को भी दुश्मनी से तिरे काम कुछ नहीं तुझ को अगर हमारे नहीं प्यार से ग़रज़

टुक देख लें चमन को चलो लाला-ज़ार तक क्या जाने फिर जिएँ न जिएँ हम बहार तक

मैं ने जो कहा मुझ पे क्या क्या न सितम गुज़रा बोला कि अबे तेरा रोते ही जनम गुज़रा

न ग़रज़ मुझ को है काफ़िर से न दीं-दार से काम रोज़-ओ-शब है मुझे उस काकुल-ए-ख़मदार से काम

इस को उम्मीद नहीं है कभी फिर बसने के और वीरानों से इस दिल का है वीराना जुदा

सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं

दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था

आसाँ न समझियो तुम नख़वत से पाक होना इक उम्र खो के हम ने सीखा है ख़ाक होना

आश्ना बेवफ़ा नहीं होता बेवफ़ा आश्ना नहीं होता

ग़ैर को तुम न आँख भर देखो क्या ग़ज़ब करते हो इधर देखो

जान-ओ-दिल हैं उदास से मेरे उठ गया कौन पास से मेरे

इज़हार-ए-ख़मोशी में है सौ तरह की फ़रियाद ज़ाहिर का ये पर्दा है कि मैं कुछ नहीं कहता

क़िस्मत ने दूर ऐसा ही फेंका हमें कि हम फिर जीते-जी पहुँच न सके अपने यार तक

वस्ल होता है जिन को दुनिया में यारब ऐसे भी लोग होते हैं

हम को भी दुश्मनी से तिरे काम कुछ नहीं तुझ को अगर हमारे नहीं प्यार से ग़रज़

टुक देख लें चमन को चलो लाला-ज़ार तक क्या जाने फिर जिएँ न जिएँ हम बहार तक

मैं ने जो कहा मुझ पे क्या क्या न सितम गुज़रा बोला कि अबे तेरा रोते ही जनम गुज़रा

न ग़रज़ मुझ को है काफ़िर से न दीं-दार से काम रोज़-ओ-शब है मुझे उस काकुल-ए-ख़मदार से काम

इस को उम्मीद नहीं है कभी फिर बसने के और वीरानों से इस दिल का है वीराना जुदा

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