ghazalKuch Alfaaz

बुझी आँखों में किरनें भर रही हो, कौन हो तुम? मेरी नींदों को रौशन कर रही हो, कौन हो तुम? मुझ ऐसे घर में तो शैतान भी आता नहीं है, तुम इतने दिन मेरे अंदर रही हो, कौन हो तुम? मैं जिस की याद में 'रोया' हुआ हूँ वो कहाँ है? मेरा तावान तुम क्यूँ भर रही हो, कौन हो तुम? भरे मज में से कमरे तक तुम्हीं लाई हो मुझ को, अब इस तन्हाई से ख़ुद डर रही हो, कौन हो तुम?

Ali Zaryoun13 Likes

Related Ghazal

वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

244 likes

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

232 likes

कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

435 likes

तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

249 likes

यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

526 likes

More from Ali Zaryoun

अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं ख़ुद अपने साथ हूँ या'नी ख़ुदा के साथ हूँ मैं मुजावरान-ए-हवस तंग हैं कि यूँँ कैसे बग़ैर शर्म-ओ-हया भी हया के साथ हूँ मैं सफ़र शुरूअ' तो होने दे अपने साथ मिरा तू ख़ुद कहेगा ये कैसी बला के साथ हूँ मैं मैं छू गया तो तिरा रंग काट डालूँगा सो अपने आप से तुझ को बचा के साथ हूँ मैं दुरूद-बर-दिल-ए-वहशी सलाम-बर-तप-ए-इश्क़ ख़ुद अपनी हम्द ख़ुद अपनी सना के साथ हूँ मैं यही तो फ़र्क़ है मेरे और उन के हल के बीच शिकायतें हैं उन्हें और रज़ा के साथ हूँ मैं मैं अव्वलीन की इज़्ज़त में आख़िरीन का नूर वो इंतिहा हूँ कि हर इब्तिदा के साथ हूँ मैं दिखाई दूँ भी तो कैसे सुनाई दूँ भी तो क्यूँँ वरा-ए-नक़्श-ओ-नवा हूँ फ़ना के साथ हूँ मैं ब-हुक्म-ए-यार लवें कब्ज़ करने आती है बुझा रही है? बुझाए हवा के साथ हूँ मैं ये साबिरीन-ए-मोहब्बत ये काशिफ़ीन-ए-जुनूँ इन्ही के संग इन्हीं औलिया के साथ हूँ मैं किसी के साथ नहीं हूँ मगर जमाल-ए-इलाहा तिरी क़िस्म तिरे हर मुब्तला के साथ हूँ मैं ज़माने भर को पता है मैं किस तरीक़ पे हूँ सभी को इल्म है किस दिल-रुबा के साथ हूँ मैं मुनाफ़िक़ीन-ए-तसव्वुफ़ की मौत हूँ मैं 'अली' हर इक असील हर इक बे-रिया के साथ हूँ मैं

Ali Zaryoun

5 likes

वो ही कर्तबा तेरी याद का, वो ही नै नवा ए ख़याल है वो ही मैं जो था तेरे हिज्र में, वो ही मशहद ए ख़द-ओ-ख़ाल है तेरी नींद किस के लिए उड़ी, मेरा ख़्वाब किस ने बुझा दिया इसे सुन कर रूख़ नहीं फेरना, तेरे मातमी का सवाल है ये मजाक़ तो नहीं हो रहा, मैं ख़ुशी से तो नहीं रो रहा कोई फिल्म तो नहीं चल रही, मेरी जान ये मेरा हाल है किसी सैय्यदा के चरण पडूं, कोई काज़मी जो दुआ करे कोई हो जो ग़म की हया करे, मेरा कर्बलाई मलाल है वो चराग़ ए शहर ए विफाक़ है, मेरे साथ जिस का फिराक़ है भले दूर पार से ही सही, मेरा राब़्ता तो बहाल है वो ख़ुशी से इतनी निहाल थी कि "अली" मैं सोच कर डर गया मैं उसे बता ही नहीं सका कि ये मेरी आख़िरी कॉल है

Ali Zaryoun

3 likes

सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को मैं रंग हूँ सो किसी मौज में मिला मुझ को मैं इन दिनों तिरी आँखों के इख़्तियार में हूँ जमाल-ए-सब्ज़ किसी तजरबे में ला मुझ को मैं बूढे जिस्म की ज़िल्लत उठा नहीं सकता किसी क़दीम तजल्ली से कर नया मुझ को मैं अपने होने की तकमील चाहता हूँ सखी सो अब बदन की हिरासत से कर रिहा मुझ को मुझे चराग़ की हैरत भी हो चुकी मालूम अब इस से आगे कोई रास्ता बता मुझ को उस इस्म-ए-ख़ास की तरकीब से बना हूँ मैं मोहब्बतों के तलफ़्फ़ुज़ से कर नया मुझ को दरून-ए-सीना जिसे दिल समझ रहा था 'अली' वो नीली आग है ये अब पता चला मुझ को

Ali Zaryoun

9 likes

इसी लिए तो मुझे सुनके तैश आया है तुम्हारा हाल किसी और ने बताया है मुझे बता मेरा भाई शहीद कैसे हुआ तू उस के साथ था तू कैसे बच के आया है अभी ये ज़ख़्म किसी पर नहीं खुला मेरा अभी ये शे'र किसी को नहीं सुनाया है

Ali Zaryoun

16 likes

जनाब-ए-शैख़ की हर्ज़ा-सराई जारी है उधर से ज़ुल्म इधर से दुहाई जारी है बिछड़ गया हूँ मगर याद करता रहता हूँ किताब छोड़ चुका हूँ पढ़ाई जारी है तिरे अलावा कहीं और भी मुलव्विस हूँ तिरी वफ़ा से मिरी बे-वफ़ाई जारी है वो क्यूँँ कहेंगे कि दोनों में अम्न हो जाए हमारी जंग से जिन की कमाई जारी है अजीब ख़ब्त-ए-मसीहाई है कि हैरत है मरीज़ मर भी चुका है दवाई जारी है

Ali Zaryoun

13 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Ali Zaryoun.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Ali Zaryoun's ghazal.