goriyon kaliyon ne maar diya jamunon valiyon ne maar diya ang hain ya rikabiyan dhan ki mohni thaliyon ne maar diya gungunate hasin kanon ki dolti baliyon ne maar diya uude uude sahab se anchal rang ki jaliyon ne maar diya zulf ki nikhaton ne jaan le li hont ki laliyon ne maar diya uff vo pyase moazzezin jinhen ras-bhari galiyon ne maar diya jhumti daliyon se jism 'adam' jhumti daliyon ne maar diya goriyon kaliyon ne mar diya jamunon waliyon ne mar diya ang hain ya rikabiyan dhan ki mohni thaaliyon ne mar diya gungunate hasin kanon ki dolti baaliyon ne mar diya ude ude sahab se aanchal rang ki jaliyon ne mar diya zulf ki nikhaton ne jaan le li hont ki laliyon ne mar diya uff wo pyase moazzezin jinhen ras-bhari galiyon ne mar diya jhumti daliyon se jism 'adam' jhumti daliyon ne mar diya
Related Ghazal
कभी मिलेंगे तो ये कर्ज़ भी उतारेंगे तुम्हारे चेहरे को पहरों तलक निहारेंगे ये क्या सितम कि खिलाड़ी बदल दिया उस ने हम इस उमीद पे बैठे थे हम ही हारेंगे हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
70 likes
बरसों पुराना दोस्त मिला जैसे ग़ैर हो देखा रुका झिझक के कहा तुम उमैर हो मिलते हैं मुश्किलों से यहाँ हम-ख़याल लोग तेरे तमाम चाहने वालों की ख़ैर हो कमरे में सिगरेटों का धुआँ और तेरी महक जैसे शदीद धुंध में बाग़ों की सैर हो हम मुत्मइन बहुत हैं अगर ख़ुश नहीं भी हैं तुम ख़ुश हो क्या हुआ जो हमारे बग़ैर हो पैरों में उस के सर को धरें इल्तिजा करें इक इल्तिजा कि जिस का न सर हो न पैर हो
Umair Najmi
59 likes
तेरी तरफ़ मेरा ख़याल क्या गया के फिर मैं तुझ को सोचता चला गया ये शहर बन रहा था मेरे सामने ये गीत मेरे सामने लिखा गया ये वस्ल सारी उम्र पर मुहीत है ये हिज्र एक रात में समा गया मुझे किसी की आस थी न प्यास थी ये फूल मुझ को भूल कर दिया गया बिछड़ के साँस खेंचना मुहाल था मैं ज़िंदगी से हाथ खेंचता गया मैं एक रोज़ दस्त क्या गया के फिर वो बाग़ मेरे हाथ से चला गया
Tehzeeb Hafi
56 likes
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जाएगा हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह दिया तू नहीं मेरा तो कोई दूसरा हो जाएगा मैं ख़ुदा का नाम ले कर पी रहा हूँ दोस्तो ज़हर भी इस में अगर होगा दवा हो जाएगा सब उसी के हैं हवा ख़ुशबू ज़मीन ओ आसमाँ मैं जहाँ भी जाऊँगा उस को पता हो जाएगा
Bashir Badr
43 likes
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँँ करें हम बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँँ करें हम ख़मोशी से अदा हो रस्म-ए-दूरी कोई हंगामा बरपा क्यूँँ करें हम ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं वफ़ा-दारी का दावा क्यूँँ करें हम वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँँ करें हम हमारी ही तमन्ना क्यूँँ करो तुम तुम्हारी ही तमन्ना क्यूँँ करें हम किया था अहद जब लम्हों में हम ने तो सारी उम्र ईफ़ा क्यूँँ करें हम नहीं दुनिया को जब पर्वा हमारी तो फिर दुनिया की पर्वा क्यूँँ करें हम ये बस्ती है मुसलामानों की बस्ती यहाँ कार-ए-मसीहा क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
67 likes
More from Abdul Hamid Adam
जब तिरे नैन मुस्कुराते हैं ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं क्यूँँ शिकन डालते हो माथे पर भूल कर आ गए हैं जाते हैं कश्तियाँ यूँँ भी डूब जाती हैं नाख़ुदा किस लिए डराते हैं इक हसीं आँख के इशारे पर क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं
Abdul Hamid Adam
5 likes
हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया वो ख़ुद पिला रहे थे मैं लहरा के पी गया तौबा के टूटने का भी कुछ कुछ मलाल था थम थम के सोच सोच के शर्मा के पी गया साग़र-ब-दस्त बैठी रही मेरी आरज़ू साक़ी शफ़क़ से जाम को टकरा के पी गया वो दुश्मनों के तंज़ को ठुकरा के पी गए मैं दोस्तों के ग़ैज़ को भड़का के पी गया सदहा मुतालिबात के बा'द एक जाम-ए-तल्ख़ दुनिया-ए-जब्र-ओ-सब्र को धड़का के पी गया सौ बार लग़्ज़िशों की क़सम खा के छोड़ दी सौ बार छोड़ने की क़सम खा के पी गया पीता कहाँ था सुब्ह-ए-अज़ल मैं भला 'अदम' साक़ी के ए'तिबार पे लहरा के पी गया
Abdul Hamid Adam
6 likes
हँस के बोला करो बुलाया करो आप का घर है आया जाया करो मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर मुस्कुराना न भूल जाया करो हद से बढ़ कर हसीन लगते हो झूटी क़स्में ज़रूर खाया करो ताकि दुनिया की दिलकशी न घटे नित-नए पैरहन में आया करो कितने सादा-मिज़ाज हो तुम 'अदम' उस गली में बहुत न जाया करो
Abdul Hamid Adam
16 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Abdul Hamid Adam.
Similar Moods
More moods that pair well with Abdul Hamid Adam's ghazal.







