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इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया जब ख़याल-ए-यार दिल में वालेहाना आ गया लौट कर गुज़रा हुआ काफ़िर ज़माना आ गया ख़ुश्क आँखें फीकी फीकी सी हँसी नज़रों में यास कोई देखे अब मुझे आँसू बहाना आ गया ग़ुंचा ओ गुल माह ओ अंजुम सब के सब बेकार थे आप क्या आए कि फिर मौसम सुहाना आ गया मैं भी देखूँ अब तिरा ज़ौक़-ए-जुनून-ए-बंदगी ले जबीन-ए-शौक़ उन का आस्ताना आ गया हुस्न-ए-काफ़िर हो गया आमादा-ए-तर्क-ए-जफ़ा फिर 'असद' मेरी तबाही का ज़माना आ गया

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थोड़ा लिक्खा और ज़ियादा छोड़ दिया आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया रोज़ इक पत्ता मुझ में आ गिरता है जब से मैं ने जंगल जाना छोड़ दिया बस कानों पर हाथ रखे थे थोड़ी देर और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिए

Tehzeeb Hafi

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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कभी मिलेंगे तो ये कर्ज़ भी उतारेंगे तुम्हारे चेहरे को पहरों तलक निहारेंगे ये क्या सितम कि खिलाड़ी बदल दिया उस ने हम इस उमीद पे बैठे थे हम ही हारेंगे हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे

Vikram Gaur Vairagi

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बात करनी है बात कौन करे दर्द से दो दो हाथ कौन करे हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं चाँद न हो तो रात कौन करे अब तुझे रब कहें या बुत समझें इश्क़ में ज़ात-पात कौन करे ज़िंदगी भर की थे कमाई तुम इस से ज़्यादा ज़कात कौन करे

Kumar Vishwas

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मैं भी तुम जैसा हूँ अपने से जुदा मत समझो आदमी ही मुझे रहने दो ख़ुदा मत समझो ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो रास आता नहीं सब को ये मोहब्बत का मरज़ मेरी बीमारी को तुम अपनी दवा मत समझो

Shakeel Azmi

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कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते हम मुजरिम-ए-तौहीन-ए-वफ़ा हो नहीं सकते ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या हम अहल-ए-मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते इक आप का दर है मिरी दुनिया-ए-अक़ीदत ये सज्दे कहीं और अदा हो नहीं सकते अहबाब पे दीवाने 'असद' कैसा भरोसा ये ज़हर भरे घूँट रवा हो नहीं सकते

Asad Bhopali

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दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा जो तिरे ग़म में फ़ना हो जाएगा दर्द जब दिल से जुदा हो जाएगा साज़-ए-हस्ती बे-सदा हो जाएगा देखिए अहद-ए-वफ़ा अच्छा नहीं मरना जीना साथ का हो जाएगा बे-नतीजा है ख़याल-ए-तर्क-ए-राह फिर किसी दिन सामना हो जाएगा अब ठहर जा याद-ए-जानाँ रो तो लूँ फ़र्ज़-ए-तन्हाई अदा हो जाएगा लहजा लहजा रख ख़याल-ए-हुस्न-ए-दोस्त लम्हा लम्हा काम का हो जाएगा ज़ौक़-ए-अज़्म-ए-बा-अमल दरकार है आग में भी रास्ता हो जाएगा अपनी जानिब जब नज़र उठ जाएगी ज़र्रा ज़र्रा आईना हो जाएगा

Asad Bhopali

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जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए बार-हा दिल ने ये महसूस किया तुम आए ऐसे इक़रार में इनकार के सौ पहलू हैं वो तो कहिए कि लबों पे न तबस्सुम आए न वो आवाज़ में रस है न वो लहजे में खनक कैसे कलियों को तिरा तर्ज़-ए-तकल्लुम आए बार-हा ये भी हुआ अंजुमन-ए-नाज़ से हम सूरत-ए-मौज उठे मिस्ल-ए-तलातुम आए ऐ मिरे वादा-शिकन एक न आने से तिरे दिल को बहकाने कई तल्ख़ तवहहुम आए

Asad Bhopali

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तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा अब के बरस बहार का मौसम न आएगा चूमूँगा किस की ज़ुल्फ़ घटाओं को देख कर इक जुर्म-ए-ख़ुश-गवार का मौसम न आएगा छलके शराब बर्क़ गिरे या जलें चराग़ ज़िक्र-ए-निगाह-ए-यार का मौसम न आएगा वादा-ख़िलाफ़ियों को तरस जाएगा यक़ीं रातों को इंतिज़ार का मौसम न आएगा तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी हो जाएगी तवील एहसास के निखार का मौसम न आएगा

Asad Bhopali

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न साथी है न मंज़िल का पता है मोहब्बत रास्ता ही रास्ता है वफ़ा के नाम पर बर्बाद हो कर वफ़ा के नाम से दिल काँपता है मैं अब तेरे सिवा किस को पुकारूँ मुक़द्दर सो गया ग़म जागता है वो सब कुछ जान कर अंजान क्यूँँ हैं सुना है दिल को दिल पहचानता है ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन मुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है

Asad Bhopali

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