कैसे ईमान नहीं लाएँगे हम तेरे सर की क़सम खाएंगे फूल फेकेंगे बस आने पे मेरे अपने बाज़ू नहीं फैलाएँगे इतने बरसो की जुदाई है कि अब उस को देखेंगे तो मर जाएँगे
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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?
Zubair Ali Tabish
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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तेरे पीछे होगी दुनिया पागल बन क्या बोला मैं ने कुछ समझा? पागल बन सहरा में भी ढूँढ़ ले दरिया पागल बन वरना मर जाएगा प्यासा पागल बन आधा दाना आधा पागल नइँ नइँ नइँ उस को पाना है तो पूरा पागल बन दानाई दिखलाने से कुछ हासिल नहीं पागल खाना है ये दुनिया पागल बन देखें तुझ को लोग तो पागल हो जाएँ इतना उम्दा इतना आला पागल बन लोगों से डर लगता है तो घर में बैठ जिगरा है तो मेरे जैसा पागल बन
Varun Anand
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हाथ ख़ाली हैं तिरे शहर से जाते जाते जान होती तो मिरी जान लुटाते जाते अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते अब के मायूस हुआ यारों को रुख़्सत कर के जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते रेंगने की भी इजाज़त नहीं हम को वर्ना हम जिधर जाते नए फूल खिलाते जाते मैं तो जलते हुए सहराओं का इक पत्थर था तुम तो दरिया थे मिरी प्यास बुझाते जाते मुझ को रोने का सलीक़ा भी नहीं है शायद लोग हँसते हैं मुझे देख के आते जाते हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते
Rahat Indori
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किसी लिबास की ख़ुशबू जब उड़ के आती है तेरे बदन की जुदाई बहुत सताती है तेरे गुलाब तरसते हैं तेरी ख़ुशबू को तेरी सफ़ेद चमेली तुझे बुलाती है तेरे बग़ैर मुझे चैन कैसे पड़ता हैं मेरे बगैर तुझे नींद कैसे आती है
Jaun Elia
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पेड़ पौधे हैं तितलियाँ नहीं हैं कैसा क़स्बा है लड़कियाँ नहीं हैं देख कर पाँव रखना पड़ता है इन पहाड़ों पे सीढ़ियाँ नहीं हैं मेरे अँगूठे से खुलेगा ये लॉक इस तिजोरी की चाबियाँ नहीं हैं नाव का वरना मसअला नहीं था इस जज़ीरे पे लकड़ियाँ नहीं हैं बद्दुआ लग गई है किस की उसे उस कलाई में चूड़ियाँ नहीं हैं बारिश आई तो भीग जाएँगे पेड़ों के पास छतरियाँ नहीं हैं
Nadir Ariz
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धुँधला गया हूँ दूर के मंज़र में जा के मैं पछता रहा हूँ शह्र से क़स्बे में आ के मैं अब उस कली पे सिर्फ़ मिरा हक़ है दोस्तो लौटा हूँ हाथ पेड़ को पहले लगा के मैं शो'ला दिए को ज़िन्दगी देते ही बुझ गया मंज़र से हट गया उसे मंज़र पे ला के मैं साहब यक़ीन कीजिए चोरी की ख़ू नहीं बाग़ आ गया हूँ दोस्त की बातों में आ के मैं उस दर के बंद होने का बदला लिया है दोस्त जो बेचता रहा हूँ दरीचे बना के मैं
Nadir Ariz
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अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते उस का नंबर है मगर काल नहीं कर सकते सीम जाएगा तो फिर नक़्श उभारेंगे कोई काम दीवार पे फ़िलहाल नहीं कर सकते रह भी सकता है तिरा नाम कहीं लिक्खा हुआ सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते दोस्त तस्वीर बहुत दूर से खींची गई है हम उजागर ये ख़द-ओ-ख़ाल नहीं कर सकते रोती आँखों पे मियाँ हाथ तो रख सकते हैं पेश अगर आप को रूमाल नहीं कर सकते दे न दे काम की उजरत ये है मर्ज़ी उस की पेशा-ए-इश्क़ में हड़ताल नहीं कर सकते दश्त आए जिसे वहशत की तलब हो 'नादिर' ये ग़िज़ा शहर हम इर्साल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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बोले तो अच्छा बुरा महसूस हो उस की ख़ामोशी से क्या महसूस हो इस तरह दीवार पर तस्वीर रख आदमी बैठा हुआ महसूस हो दाम मुँह माँगे मिलेंगे और नक़्द क़त्ल लेकिन हादसा महसूस हो रख लिया अख़बार पैसों की जगह ताकि बटुआ कुछ भरा महसूस हो देखना चाहूँ उसे तो हर कोई मेरी जानिब' देखता महसूस हो पास जाने पर खुले प्यासे पे रेत दूर से पानी खड़ा महसूस हो
Nadir Ariz
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तमाम शह्र को हुलिया बता दिया गया है मिरे फ़रार को मुश्किल बना दिया गया है बस एक ज़िद कि उसे देखना है बारे-दिगर जो काम आए थे उस को भुला दिया गया है मैं जाँनिसार हूँ या बे-वफ़ा बताओ मुझे तुम्हें लहू का नमूना दिखा दिया गया है बस उस को माँगता रहता हूँ घर में बैठे हुए मुझे दु'आओं का चस्का लगा दिया गया है हमें तलाशने वालों का रोक कर रस्ता हमारे बारे तजस्सुस बढ़ा दिया गया है
Nadir Ariz
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