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कौन पुर्सान-ए-हाल है मेरा ज़िंदा रहना कमाल है मेरा तू नहीं तो तिरा ख़याल सही कोई तो हम-ख़याल है मेरा मेरे आसाब दे रहे हैं जवाब हौसला कब निढाल है मेरा चढ़ता सूरज बता रहा है मुझे बस यहीं से ज़वाल है मेरा सब की नज़रें मिरी निगाह में हैं किस को कितना ख़याल है मेरा

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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तेरी मुश्किल न बढ़ाऊँगा चला जाऊँगा अश्क आँखों में छुपाऊँगा चला जाऊँगा अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे जैसे ही होश में आऊँगा चला जाऊँगा ख़्वाब लेने कोई आए कि न आए कोई मैं तो आवाज़ लगाऊँगा चला जाऊँगा चंद यादें मुझे बच्चों की तरह प्यारी हैं उन को सीने से लगाऊँगा चला जाऊँगा मुद्दतों बा'द मैं आया हूँ पुराने घर में ख़ुद को जी भर के रुलाऊँगा चला जाऊँगा इस जज़ीरे में ज़ियादा नहीं रहना अब तो आजकल नाव बनाऊँगा चला जाऊँगा मौसम-ए-गुल की तरह लौट के आऊँगा 'हसन' हर तरफ़ फूल खिलाऊँगा चला जाऊँगा

Hasan Abbasi

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अब मेरे साथ नहीं है समझे ना समझाने की बात नहीं है समझे ना तुम माँगोगे और तुम्हें मिल जाएगा प्यार है ये ख़ैरात नहीं है समझे ना मैं बादल हूँ जिस पर चाहूँ बरसूँगा मेरी कोई ज़ात नहीं है समझे ना अपना ख़ाली हाथ मुझे मत दिखलाओ इस में मेरा हाथ नहीं है समझे ना

Zubair Ali Tabish

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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तमाम उम्र मैं हर सुब्ह की अज़ान के बा'द इक इम्तिहान से गुज़रा एक इम्तिहान के बा'द ख़ुदा करे कि कहीं और गर्दिश-ए-तक़दीर किसी का घर न उजाड़े मेरे मकान के बा'द धरा ही क्या है मेरे पास नज़्र करने को तेरे हुज़ूर मेरी जान मेरी जान के बा'द ये राज़ उस पे खुलेगा जो ख़ुद को पहचाने कि इक यक़ीन की मंज़िल भी है गुमान के बा'द ये जुर्म कम है कि सच्चाई का भरम रक्खा सज़ा तो होनी थी मुझ को मेरे बयान के बा'द मेरे ख़ुदा उसे अपनी अमान में रखना जो बच गया है मेरे खेत में लगान के बा'द

Saqi Amrohvi

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मंज़िलें लाख कठिन आएँ गुज़र जाऊँगा हौसला हार के बैठूँगा तो मर जाऊँगा चल रहे थे जो मेरे साथ कहाँ हैं वो लोग जो ये कहते थे कि रस्ते में बिखर जाऊँगा दर-ब-दर होने से पहले कभी सोचा भी न था घर मुझे रास न आया तो किधर जाऊँगा याद रक्खे मुझे दुनिया तिरी तस्वीर के साथ रंग ऐसे तिरी तस्वीर में भर जाऊँगा लाख रोकें ये अँधेरे मिरा रस्ता लेकिन मैं जिधर रौशनी जाएगी उधर जाऊँगा रास आई न मोहब्बत मुझे वर्ना 'साक़ी' मैं ने सोचा था कि हर दिल में उतर जाऊँगा

Saqi Amrohvi

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