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ख़ामोशी से उस की बस झगड़ा हुआ हर अँधेरा रूह का उजला हुआ धूप ने साए खरोंचे इस क़दर ज़िन्दगी का रंग चितकबरा हुआ यार ये तुकबंदियाँ क्यूँ कर भला शा'इरी करते थे उस का क्या हुआ बदहवा सेी दूर तक फैली हुई मैं कि बच्चा भीड़ में खोया हुआ वो यक़ीनन आ गए हैं लौट कर वर्ना कैसे शहर सतरंगा हुआ

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शाहसाज़ी में रियायत भी नहीं करते हो सामने आके हुकूमत भी नहीं करते हो तुम सेे क्या बात करे कौन कहाँ क़त्ल हुआ तुम तो इस ज़ुल्म पे हैरत भी नहीं करते हो अब मेरे हाल पे क्यूँ तुम को परेशानी है अब तो तुम मुझ सेे मुहब्बत भी नहीं करते हो प्यार करने की सनद कैसे तुम्हें जारी करूँँ तुम अभी ठीक से नफ़रत भी नहीं करते हो मश्वरे हँस के दिया करते थे दीवानों को क्या हुआ अब तो नसीहत भी नहीं करते हो

Ali Zaryoun

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बड़े तहम्मुल से रफ़्ता रफ़्ता निकालना है बचा है जो तुझ में मेरा हिस्सा निकालना है ये रूह बरसों से दफ़्न है तुम मदद करोगे बदन के मलबे से इस को ज़िंदा निकालना है नज़र में रखना कहीं कोई ग़म-शनास गाहक मुझे सुख़न बेचना है ख़र्चा निकालना है निकाल लाया हूँ एक पिंजरे से इक परिंदा अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है ये तीस बरसों से कुछ बरस पीछे चल रही है मुझे घड़ी का ख़राब पुर्ज़ा निकालना है ख़याल है ख़ानदान को इत्तिलाअ' दे दूँ जो कट गया उस शजर का शजरा निकालना है मैं एक किरदार से बड़ा तंग हूँ क़लमकार मुझे कहानी में डाल ग़ुस्सा निकालना है

Umair Najmi

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तुम्हारा रंग दुनिया ने छुआ था तब कहाँ थे तुम? हमारा कैनवस ख़ाली पड़ा था तब कहाँ थे तुम? मेरे लशकर में शिरकत की इजाज़त माँगने वालो! मैं परचम थाम कर तन्हा खड़ा था तब कहाँ थे तुम? तुम्हारी दस्तकों पर रहम आता है मुझे लेकिन ये दरवाज़ा कई दिन से खुला था तब कहाँ थे तुम? फलों पर हक़ जताने आए हो तो ये भी बतला दो मैं जब पौधों को पानी दे रहा था तब कहाँ थे तुम? ये बस इक रस्मिया तफ़तीश है, आराम से बैठो वफ़ा का ख़ून जिस शब को हुआ था तब कहाँ थे तुम? मुआ'फ़ी चाहता हूँ अब तो बस ख़बरों से मतलब है मैं जब रूमानी फ़िल्में देखता था तब कहाँ थे तुम?

Zubair Ali Tabish

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हाथ ख़ाली हैं तिरे शहर से जाते जाते जान होती तो मिरी जान लुटाते जाते अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते अब के मायूस हुआ यारों को रुख़्सत कर के जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते रेंगने की भी इजाज़त नहीं हम को वर्ना हम जिधर जाते नए फूल खिलाते जाते मैं तो जलते हुए सहराओं का इक पत्थर था तुम तो दरिया थे मिरी प्यास बुझाते जाते मुझ को रोने का सलीक़ा भी नहीं है शायद लोग हँसते हैं मुझे देख के आते जाते हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

Rahat Indori

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उस के हाथों में जो ख़ंजर है ज़्यादा तेज है और फिर बचपन से ही उस का निशाना तेज है जब कभी उस पार जाने का ख़याल आता मुझे कोई आहिस्ता से कहता था की दरिया तेज है आज मिलना था बिछड़ जाने की निय्यत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना तेज है अपना सब कुछ हार के लौट आए हो न मेरे पास मैं तुम्हें कहता भी रहता की दुनिया तेज है आज उस के गाल चू में हैं तो अंदाज़ा हुआ चाय अच्छी है मगर थोडा सा मीठा तेज है

Tehzeeb Hafi

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अगर तू बे-वफ़ा है ध्यान रखना मुझे सब कुछ पता है ध्यान रखना बिछड़ते वक़्त हम ने कह दिया था हमारा दिल दुखा है ध्यान रखना ख़ुदा जिस की मोहब्बत में बनी हो वो कइयों का ख़ुदा है ध्यान रखना जिसे तुम दोस्त केवल जानती हो वो तुम को चाहता है ध्यान रखना

Anand Raj Singh

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ख़्वाब तुम्हारे आते हैं इतराते हैं हम जब जब सो जाते हैं इतराते हैं उस पर मरने वाले जितने लड़के हैं मुझ सेे मिलने आते हैं इतराते हैं सरकारी दफ्तर में बेटा नौकर है पापा मिल कर आते हैं इतराते हैं हम तो ख़ामोशी में डूबे हैं लेकिन ज़ख़्म हमारे गाते हैं इतराते हैं मैं ऐसा गुमनाम हुआ हूँ लोग मुझे मेरा शे'र सुनाते हैं इतराते हैं

Anand Raj Singh

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ख़्वाब के ही हम सहारे चल रहे हैं ज़ख़्म को भी गुदगुदाते चल रहे हैं क्या बताएं अब तुम्हें हम हाल अपना हिज्र में कैसे दीवाने चल रहे हैं दरिया की तन्हाई का तो सोचिये साथ जिस के दो किनारे चल रहे हैं तुम को क्या लगता है तन्हा चल रहा हूँ साथ मेरे चाँद तारे चल रहे हैं

Anand Raj Singh

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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