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ma'rifat ke liye agahi ke liye nur-e-haq chahiye raushni ke liye ji rahe hain kisi ki khushi ke liye varna kya hai yahan zindagi ke liye aap apna ta'aruf sar-e-anjuman kitna mushkil hai ik ajnabi ke liye dasht-e-ghhurbat men kuchh aur mumkin nahin jugnuon ke siva raushni ke liye rakh diye absharon ne dil khol kar dasht men ek pyasi nadi ke liye vaqt ke aage us ne bhi rakh di sipar jo tha mashhur apni khudi ke liye 'rahbar' e'zaz 'ohda qayadat ana masala ban gae aadmi ke liye ma'rifat ke liye aagahi ke liye nur-e-haq chahiye raushni ke liye ji rahe hain kisi ki khushi ke liye warna kya hai yahan zindagi ke liye aap apna ta'aruf sar-e-anjuman kitna mushkil hai ek ajnabi ke liye dasht-e-ghurbat mein kuchh aur mumkin nahin jugnuon ke siwa raushni ke liye rakh diye aabshaaron ne dil khol kar dasht mein ek pyasi nadi ke liye waqt ke aage us ne bhi rakh di sipar jo tha mashhur apni khudi ke liye 'rahbar' e'zaz 'ohda qayaadat ana masala ban gae aadmi ke liye

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गले तो लगना है उस सेे कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए अगर कोई तेरी रफ़्तार मापने निकले दिमाग़ क्या है जहानों की रौशनी लग जाए तू हाथ उठा नहीं सकता तो मेरा हाथ पकड़ तुझे दुआ नहीं लगती तो शा'इरी लग जाए पता करूँँगा अँधेरे में किस से मिलता है और इस अमल में मुझे चाहे आग भी लग जाए हमारे हाथ ही जलते रहेंगे सिगरेट से? कभी तुम्हारे भी कपड़ों पे इस्त्री लग जाए हर एक बात का मतलब निकालने वालों तुम्हारे नाम के आगे न मतलबी लग जाए क्लासरूम हो या हश्र कैसे मुमकिन है हमारे होते तेरी ग़ैर-हाज़िरी लग जाए मैं पिछले बीस बरस से तेरी गिरफ़्त में हूँ के इतने देर में तो कोई आई. जी. लग जाए

Tehzeeb Hafi

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इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ हम तेरे सर की क़सम झूठ ही खाने लग जाएँ इतने सन्नाटे पिए मेरी समा'अत ने कि अब सिर्फ़ आवाज़ पे चाहूँ तो निशाने लग जाएँ चलिए कुछ और नहीं आह-शुमारी ही सही हम किसी काम तो इस दिल के बहाने लग जाएँ हम वो गुम-गश्त-ए-मोहब्बत हैं कि तुम तो क्या हो ख़ुद को हम ढूँडने निकलें तो ज़माने लग जाएँ ख़्वाब कुछ ऐसे दिखाए हैं फ़क़ीरी ने मुझे जिन की ता'बीर में शाहों के ख़ज़ाने लग जाएँ मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मिरे पाँव दबाने लग जाएँ

Mehshar Afridi

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बे-सबब उस के नाम की मैं ने काट तो ली थी ज़िंदगी मैं ने वो मुझे ख़्वाब में नज़र आया और तस्वीर खींच ली मैं ने आप का काम हो गया आक़ा लाश दरिया में फेंक दी मैं ने खेल तू इस लिए भी हारेगा चाल चलनी है आख़िरी मैं ने एक वो बे-हिजाब और उस पर डाल रक्खी थी रौशनी मैं ने

Zia Mazkoor

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ज़माना इस लिए लहजा बदल रहा है दोस्त हमारा वक़्त ज़रा पीछे चल रहा दोस्त मैं मुस्कुरा रहा हूँ तेरी रुख़्सती पे अगर तो मुझ में कौन है जो हाथ मल रहा है दोस्त न मिल सकी मिरे हिस्से की रौशनी भी मुझे मिरा चराग़ कहीं और जल रहा है दोस्त पलीद कर के हमारे वजूद की मिट्टी हमारे नाम का सूरज निकल रहा है दोस्त बताएँ क्या तुझे अब ख़स्ता-हाली-ए-दिल 'राज़' शिकस्ता ख़्वाब के टुकड़ों पे पल रहा है दोस्त

Ismail Raaz

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कल शब लिबास उस ने जो पहना गुलाब का ख़ुशबू गुलाब की कहीं चर्चा गुलाब का देखी हसीन लोगों की औलाद भी हसीन पौधे से उगता देखा है पौधा गुलाब का मैं था गुलाब तोड़ने वालों के शहर से और उस को चाहिए था बगीचा गुलाब का सुनते हो आज टूट गया लाडले का दिल अब उस के आगे ज़िक्र न करना गुलाब का

Kushal Dauneria

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