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main us ki ankhon se chhalki sharab piita huun ghharib ho ke bhi mahngi sharab piita huun mujhe nashe men bahakte kabhi nahin dekha vo janta hai main kitni sharab piita huun use bhi dekhun to pahchanne men der lage kabhi kabhi to main itni sharab piita huun purane chahne valon ki yaad aane lage isi liye main purani sharab piita huun main us ki aankhon se chhalki sharab pita hun gharib ho ke bhi mahngi sharab pita hun mujhe nashe mein bahakte kabhi nahin dekha wo jaanta hai main kitni sharab pita hun use bhi dekhun to pahchanne mein der lage kabhi kabhi to main itni sharab pita hun purane chahne walon ki yaad aane lage isi liye main purani sharab pita hun

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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ सारे मर्द एक जैसे हैं तुम ने कैसे कह डाला मैं भी तो एक मर्द हूँ तुम को ख़ुद से बेहतर मानता हूँ मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्कियत का दावा नहीं वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ

Ali Zaryoun

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे

Rahat Indori

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हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं वो ग़ैर की बाँहों में आराम से सोते हैं हम अश्क जुदाई के गिरने ही नहीं देते बेचैन सी पलकों में मोती से पिरोते हैं होता चला आया है बे-दर्द ज़माने में सच्चाई की राहों में काँटे सभी बोते हैं अंदाज़-ए-सितम उन का देखे तो कोई 'हसरत' मिलने को तो मिलते हैं नश्तर से चुभोते हैं

Hasrat Jaipuri

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मैं उस की आँखों से छलकी शराब पीता हूँ ग़रीब हो के भी महँगी शराब पीता हूँ मुझे नशे में बहकते कभी नहीं देखा वो जानता है मैं कितनी शराब पीता हूँ उसे भी देखूँ तो पहचानने में देर लगे कभी कभी तो मैं इतनी शराब पीता हूँ पुराने चाहने वालों की याद आने लगे इसी लिए मैं पुरानी शराब पीता हूँ

Hasrat Jaipuri

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शो'ला ही सही आग लगाने के लिए आ फिर नूर के मंज़र को दिखाने के लिए आ ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ ऐ दोस्त मुझे गर्दिश-ए-हालात ने घेरा तू ज़ुल्फ़ की कमली में छुपाने के लिए आ दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ मतलब तिरी आमद से है दरमाँ से नहीं है 'हसरत' की क़सम दिल ही दुखाने के लिए आ

Hasrat Jaipuri

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जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँँंनहीं देते ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते लिल्लाह शब-ओ-रोज़ की उलझन से निकालो तुम मेरे नहीं हो तो बता क्यूँ नहीं देते रह रह के न तड़पाओ ऐ बे-दर्द मसीहा हाथों से मुझे ज़हर पिला क्यूँ नहीं देते जब उस की वफ़ाओं पे यक़ीं तुम को नहीं है 'हसरत' को निगाहों से गिरा क्यूँ नहीं देते

Hasrat Jaipuri

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ये कौन आ गई दिल-रुबा महकी महकी फ़ज़ा महकी महकी हवा महकी महकी वो आँखों में काजल वो बालों में गजरा हथेली पे उस के हिना महकी महकी ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी सवेरे सवेरे मिरे घर पे आई ऐ 'हसरत' वो बाद-ए-सबा महकी महकी

Hasrat Jaipuri

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