ghazalKuch Alfaaz

मुसलसल वार करने पर भी ज़र्रा भर नहीं टूटा मैं पत्थर हो गया फिर भी तेरा ख़ंजर नहीं टूटा मुझे बर्बाद करने तक ही उस के आस्ताँ टूटे मेरा दिल टूटने के बा'द उस का घर नहीं टूटा हम उस का ग़म भला क़िस्मत पे कैसे टाल सकते हैं हमारे हाथ में टूटा है वो गिरकर नहीं टूटा सरों पर आसमाँ आँखों से आईने नज़र से दिल बहुत कुछ टूट सकता था बहुत कुछ पर नहीं टूटा तिलिस्म-ए-यार में जब भी कमी आई नमी आई उन आँखों में जिन्हें लगता था जादूगर नहीं टूटा तेरे भेजे हुए तेशों की धारें तेज़ थी 'हाफ़ी' मगर इनसे ये कोह-ए-ग़म ज़ियादा तर नहीं टूटा

Tehzeeb Hafi60 Likes

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे

Tehzeeb Hafi

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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

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याद तब करते हो करने को न हो जब कुछ भी और कहते हो तुम्हें इश्क़ है मतलब कुछ भी अब जो आ आ के बताते हो वो शख़्स ऐसा था जब मेरे साथ था वो क्यूँँ न कहा तब कुछ भी वक्फ़े-वक्फ़े से मुझे देखने आते रहना हिज्र की शब है सो हो सकता है इस शब कुछ भी

Umair Najmi

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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा तू तो बीनाई है मेरी तेरे अलावा मुझे कुछ भी दिखता नहीं मैं ने तुझ को अगर तेरे घर पे उतारा तो मैं कैसे घर जाऊँगा चाहता हूँ तुम्हें और बहुत चाहता हूँ, तुम्हें ख़ुद भी मालूम है हाँ अगर मुझ सेे पूछा किसी ने तो मैं सीधा मुँह पर मुकर जाऊँगा तेरे दिल से तेरे शहर से तेरे घर से तेरी आँख से तेरे दर से तेरी गलियों से तेरे वतन से निकाला हुआ हूँ किधर जाऊँगा

Tehzeeb Hafi

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तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं तुझे हर बहाने से हम देखते हैं हमारी तरफ़ अब वो कम देखते हैं वो नज़रें नहीं जिन को हम देखते हैं ज़माने के क्या क्या सितम देखते हैं हमीं जानते हैं जो हम देखते हैं

Dagh Dehlvi

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अश्क ज़ाया' हो रहे थे देख कर रोता न था जिस जगह बनता था रोना मैं उधर रोता न था सिर्फ़ तेरी चुप ने मेरे गाल गीले कर दिए मैं तो वो हूँ जो किसी की मौत पर रोता न था मुझ पे कितने सानिहे गुज़रे पर उन आँखों को क्या मेरा दुख ये हैं कि मेरा हम सफ़र रोता न था मैं ने उस के वस्ल में भी हिज्र काटा है कहीं वो मेरे काँधे पे रख लेता था सर रोता न था प्यार तो पहले भी उस सेे था मगर इतना नहीं तब मैं उस को छू तो लेता था मगर रोता न था गिर्या-ओ-ज़ारी को भी इक ख़ास मौसम चाहिए मेरी आँखें देख लो मैं वक़्त पर रोता न था

Tehzeeb Hafi

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चीख़ते हैं दर-ओ-दीवार नहीं होता मैं आँख खुलने पे भी बेदार नहीं होता मैं ख़्वाब करना हो सफ़र करना हो या रोना हो मुझ में ख़ूबी है बेज़ार नहीं होता में अब भला अपने लिए बनना सँवरना कैसा ख़ुद से मिलना हो तो तय्यार नहीं होता मैं कौन आएगा भला मेरी अयादत के लिए बस इसी ख़ौफ़ से बीमार नहीं होता मैं मंज़िल-ए-इश्क़ पे निकला तो कहा रस्ते ने हर किसी के लिए हमवार नहीं होता मैं तेरी तस्वीर से तस्कीन नहीं होती मुझे तेरी आवाज़ से सरशार नहीं होता मैं लोग कहते हैं मैं बारिश की तरह हूँ 'हाफ़ी' अक्सर औक़ात लगातार नहीं होता मैं

Tehzeeb Hafi

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तेरी तरफ़ मेरा ख़याल क्या गया के फिर मैं तुझ को सोचता चला गया ये शहर बन रहा था मेरे सामने ये गीत मेरे सामने लिखा गया ये वस्ल सारी उम्र पर मुहीत है ये हिज्र एक रात में समा गया मुझे किसी की आस थी न प्यास थी ये फूल मुझ को भूल कर दिया गया बिछड़ के साँस खेंचना मुहाल था मैं ज़िंदगी से हाथ खेंचता गया मैं एक रोज़ दस्त क्या गया के फिर वो बाग़ मेरे हाथ से चला गया

Tehzeeb Hafi

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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है आवाजों का हब्स अगर बढ़ जाता है ख़ामोशी मुझ में दरवाज़ा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नियमत है रोने में आसानी पैदा करती है सच पूछो तो हाफ़ी ये तन्हाई भी जीने का सामान मुहय्या करती है

Tehzeeb Hafi

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तेरा चेहरा तेरे होंठ और पलकें देखें दिल पे आँखें रक्खे तेरी साँसें देखें मेरे मालिक आप तो ऐसा कर सकते हैं साथ चले हम और दुनिया की आँखें देखें साल होने को आया है वो कब लौटेगा आओ खेत की सैर को निकले कुंजें देखें हम तेरे होंठों को लरजिश कब भूलें हैं पानी में पत्थर फेंकें और लहरें देखें

Tehzeeb Hafi

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