मेरे जिया की मेरे पिया को तुम्हीं सुनाओ निगोड़ी अँखियों ये चुप का पत्थर पड़ा है दिल पर इसे हटाओ निगोड़ी अँखियों बरसती जाओ बरसती जाओ बरसती जाओ बरसती जाओ कि दिल से सब कुछ बहा के उस की जगह बनाओ निगोड़ी अँखियों उसी को देखो उसी को देखो उसी को देखो उसी को देखो कि देखने का है काम तुम को सो काम आओ निगोड़ी अँखियों मुआँ ये दर्पण मुआँ ये दर्पण मुआँ ये दर्पण मुआँ ये दर्पण मुझे इसी की नज़र लगी है इसे हटाओ निगोड़ी अँखियों वो उठ गया है वो चल दिया है वो जा रहा है चला न जाए उसे मनाओ उसे मनाओ उसे मनाओ निगोड़ी अँखियों
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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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छोड़ कर जाने का दस्तूर नहीं होता था कोई भी ज़ख़्म हो नासूर नहीं होता था मेरे भी होंठ पे सिगरेट नहीं होती थी उस की भी माँग में सिंदूर नहीं होता था औरतें प्यार में तब शौक़ नहीं रखती थी आदमी इश्क़ में मज़दूर नहीं होता था
Kushal Dauneria
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे
Tehzeeb Hafi
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो लानत हो ऐसे शख़्स पे और बेशुमार हो अब इतनी देर भी ना लगा, ये हो ना कहीं तू आ चुका हो और तेरा इंतिज़ार हो मैं फूल हूँ तो फिर तेरे बालो में क्यूँ नहीं हूँ तू तीर है तो मेरे कलेजे के पार हो एक आस्तीन चढ़ाने की आदत को छोड़ कर ‘हाफ़ी’ तुम आदमी तो बहुत शानदार हो
Tehzeeb Hafi
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सुनने में आया है मेरा चर्चा नइँ था मुझ को जितना लगता था मैं उतना नइँ था उस को अच्छे लगते थे सब छैल छबीले हम जैसों को उस सेे कोई ख़तरा नइँ था सादा दिल थे सो हम अपने ही दुश्मन थे वो भी अच्छा लगता था जो अच्छा नइँ था शर्मीले साजन की सब बेशर्मी देखी सब कुछ सोचा करता था वो कहता नइँ था अच्छी सूरत कितनी अच्छी हो सकती थी लेकिन तब तक मैं ने उस को देखा नइँ था
Vishal Bagh
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ख़बर सुन कर वो ये इतरा रहा है मुझे उस का बिछोड़ा खा रहा है मेरे सय्याद को कोई बुला दो मेरे पिंजरे को तोड़ा जा रहा है निकलना है हमें कब से सफ़र पर मगर ये जिस्म आड़े आ रहा है मैं उस को याद भी करना न चाहूँ वो आ कर ख़्वाब में उकसा रहा है चलो उस को अज़ीयत से निकालें सुना है अब भी वो पछता रहा है
Vishal Bagh
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वो जो लिखा है सब किताबों में वो ही शामिल नहीं निसाबों में उस की तासीर ऐसे काटी है हम ने घोला उसे शराबों में ये मेरी हिचकियाँ बताती हैं मैं बक़ाया हूँ कुछ हिसाबों में तो कोई तजरबा ही कर लें क्या कुछ नहीं मिल रहा किताबों में हम उसे यूँ ही मिल गए होते उस ने ढूँढ़ा नहीं ख़राबों में आओ और आ के फिर बिछड़ जाओ कुछ इज़ाफ़ा करो 'अज़ाबों में
Vishal Bagh
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अपनी मर्ज़ी से कुछ चुनूँगा मैं हर अदा पर नहीं मरूँगा मैं वो अगर ऐसे देख ले मुझ को उस को अच्छा नहीं लगूँगा मैं बाग़ में दिल नहीं लगा अब के अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं उस सेे आगे नहीं निकलना पर उस के पीछे नहीं चलूँगा मैं कह गए थे वो याद रक्खेंगे याद ही तो नहीं रहूँगा मैं
Vishal Bagh
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जब वो बोले कि कोई प्यारा था उन का मेरी तरफ़ इशारा था हम निकल आए जिस्म से बाहर उस ने कुछ इस तरह पुकारा था फेर देता था वो नज़र अपनी हर नज़र का यही उतारा था डूब जाना ही ठीक था मेरा मेरे दोनों तरफ़ किनारा था आख़िरश बोझ हो गया देखो मुझ को जो जिस्म जाँ से प्यारा था
Vishal Bagh
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