ghazalKuch Alfaaz

सोच रहा हूँ घर आंगन में एक लगाऊँ आम का पेड़ खट्टा खट्टा, मीठा मीठा या'नी तेरे नाम का पेड़ एक जोगी ने बचपन और बुढ़ापे को ऐसे समझाया वो था मेरे आग़ाज़ का पौधाये है मेरे अंजाम का पेड़ सारे जीवन की अब इस सेे बेहतर होगी क्या तस्वीर भोर की कोंपल, सुब्ह के मेवे, धूप की शाख़ें, शाम का पेड़ कल तक जिस की डाल डाल पर फूल मसर्रत के खिलते थे आज उसी को सब कहते हैं रंज-ओ-ग़म-ओ-आलाम का पेड़ इक आंधी ने सब बच्चों से उन का साया छीन लिया छांव में जिन की चैन बहुत था जो था जो था बड़े आराम का पेड़ नीम हमारे घर की शोभा जामुन से बचपन का रिश्ता हम क्या जाने किस रंगत का होता है बादाम का पेड़

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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का

Waseem Barelvi

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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चांदनी में रात भर सारा जहांअच्छा लगा धूप जब फैली तो अपना ही मकांअच्छा लगा अब तो ये एहसास भी बाक़ी नहीं है दोस्तों किस जगह हम मुज़महिल थे और कहांअच्छा लगा आके अब ठहरे हुए पानी से दिलचस्पी हुई एक मुद्दत तक हमें आबे रवांअच्छा लगा लुट गए जब रास्ते में जाके तब आँखें खुली पहले तो एख़लाक़-ए-मीर कारवांअच्छा लगा जब हक़ीक़त सामने आई तो हैरत में पड़े मुद्दतों हम को भी हुस्ने दास्तांअच्छा लगा

Anwar Jalalpuri

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पराया कौन है और कौन अपना सब भुला देंगे मता-ए-ज़िंदगानी एक दिन हम भी लुटा देंगे तुम अपने सामने की भीड़ से होकर गुज़र जाओ कि आगे वाले तो हर गिज़ न तुम को रास्ता देंगे जलाए हैं दिए तो फिर हवाओ पर नज़र रखो ये झोकें एक पल में सब चराग़ों को बुझा देंगे कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िन्दगी क्या है ज़मीं से एक मुठ्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे गिला, शिकवा, हसद, कीना, के तोहफ़े मेरी किस्मत है मेरे अहबाब अब इस सेे ज़ियादा और क्या देंगे मुसलसल धूप में चलना चिराग़ों की तरह जलना ये हंगा में तो मुझ को वक़्त से पहले थका देंगे अगर तुम आ समाँ पर जा रहे हो, शौक़ से जाओ मेरे नक़्शे क़दम आगे की मंज़िल का पता देंगे

Anwar Jalalpuri

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