सोच रहा हूँ घर आंगन में एक लगाऊँ आम का पेड़ खट्टा खट्टा, मीठा मीठा या'नी तेरे नाम का पेड़ एक जोगी ने बचपन और बुढ़ापे को ऐसे समझाया वो था मेरे आग़ाज़ का पौधाये है मेरे अंजाम का पेड़ सारे जीवन की अब इस सेे बेहतर होगी क्या तस्वीर भोर की कोंपल, सुब्ह के मेवे, धूप की शाख़ें, शाम का पेड़ कल तक जिस की डाल डाल पर फूल मसर्रत के खिलते थे आज उसी को सब कहते हैं रंज-ओ-ग़म-ओ-आलाम का पेड़ इक आंधी ने सब बच्चों से उन का साया छीन लिया छांव में जिन की चैन बहुत था जो था जो था बड़े आराम का पेड़ नीम हमारे घर की शोभा जामुन से बचपन का रिश्ता हम क्या जाने किस रंगत का होता है बादाम का पेड़
Related Ghazal
चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का
Waseem Barelvi
103 likes
यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
526 likes
ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
355 likes
उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
465 likes
क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
371 likes
More from Anwar Jalalpuri
चांदनी में रात भर सारा जहांअच्छा लगा धूप जब फैली तो अपना ही मकांअच्छा लगा अब तो ये एहसास भी बाक़ी नहीं है दोस्तों किस जगह हम मुज़महिल थे और कहांअच्छा लगा आके अब ठहरे हुए पानी से दिलचस्पी हुई एक मुद्दत तक हमें आबे रवांअच्छा लगा लुट गए जब रास्ते में जाके तब आँखें खुली पहले तो एख़लाक़-ए-मीर कारवांअच्छा लगा जब हक़ीक़त सामने आई तो हैरत में पड़े मुद्दतों हम को भी हुस्ने दास्तांअच्छा लगा
Anwar Jalalpuri
1 likes
पराया कौन है और कौन अपना सब भुला देंगे मता-ए-ज़िंदगानी एक दिन हम भी लुटा देंगे तुम अपने सामने की भीड़ से होकर गुज़र जाओ कि आगे वाले तो हर गिज़ न तुम को रास्ता देंगे जलाए हैं दिए तो फिर हवाओ पर नज़र रखो ये झोकें एक पल में सब चराग़ों को बुझा देंगे कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िन्दगी क्या है ज़मीं से एक मुठ्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे गिला, शिकवा, हसद, कीना, के तोहफ़े मेरी किस्मत है मेरे अहबाब अब इस सेे ज़ियादा और क्या देंगे मुसलसल धूप में चलना चिराग़ों की तरह जलना ये हंगा में तो मुझ को वक़्त से पहले थका देंगे अगर तुम आ समाँ पर जा रहे हो, शौक़ से जाओ मेरे नक़्शे क़दम आगे की मंज़िल का पता देंगे
Anwar Jalalpuri
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Anwar Jalalpuri.
Similar Moods
More moods that pair well with Anwar Jalalpuri's ghazal.







