तूर-ए-सीना है सर करोगे मियाँ अपने अंदर सफ़र करोगे मियाँ तुम हमें रोज़ याद करते हो फिर तो तुम उम्र भर करोगे मियाँ वो जो इक लफ्ज़ मर गया है उस को किस की ख़बर करोगे मियाँ और दिल-ए-दरवेश एक मदीना है तुम मदीने में सैर करोगे मियाँ
Related Ghazal
यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
526 likes
ये सात आठ पड़ोसी कहाँ से आए मेरे तुम्हारे दिल में तो कोई न था सिवाए मेरे किसी ने पास बिठाया बस आगे याद नहीं मुझे तो दोस्त वहाँ से उठा के लाए मेरे ये सोच कर न किए अपने दर्द उस के सुपुर्द वो लालची है असासे न बेच खाए मेरे इधर किधर तू नया है यहाँ कि पागल है किसी ने क्या तुझे क़िस्से नहीं सुनाए मेरे वो आज़माए मेरे दोस्त को ज़रूर मगर उसे कहो कि तरीके न आज़माए मेरे
Umair Najmi
59 likes
किया बादलों में सफ़र ज़िंदगी भर ज़मीं पर बनाया न घर ज़िंदगी भर सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं न आया हमें ये हुनर ज़िंदगी भर मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर
Anwar Shaoor
95 likes
सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?
Zubair Ali Tabish
140 likes
वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का ढूँढ़ता था जो इक नई दुनिया लौट के अपने घर गया कब का वो जो लाया था हम को दरिया तक पार अकेले उतर गया कब का उस का जो हाल है वही जाने अपना तो ज़ख़्म भर गया कब का ख़्वाब-दर-ख़्वाब था जो शीराज़ा अब कहाँ है बिखर गया कब का
Javed Akhtar
62 likes
More from Ali Zaryoun
अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं ख़ुद अपने साथ हूँ या'नी ख़ुदा के साथ हूँ मैं मुजावरान-ए-हवस तंग हैं कि यूँँ कैसे बग़ैर शर्म-ओ-हया भी हया के साथ हूँ मैं सफ़र शुरूअ' तो होने दे अपने साथ मिरा तू ख़ुद कहेगा ये कैसी बला के साथ हूँ मैं मैं छू गया तो तिरा रंग काट डालूँगा सो अपने आप से तुझ को बचा के साथ हूँ मैं दुरूद-बर-दिल-ए-वहशी सलाम-बर-तप-ए-इश्क़ ख़ुद अपनी हम्द ख़ुद अपनी सना के साथ हूँ मैं यही तो फ़र्क़ है मेरे और उन के हल के बीच शिकायतें हैं उन्हें और रज़ा के साथ हूँ मैं मैं अव्वलीन की इज़्ज़त में आख़िरीन का नूर वो इंतिहा हूँ कि हर इब्तिदा के साथ हूँ मैं दिखाई दूँ भी तो कैसे सुनाई दूँ भी तो क्यूँँ वरा-ए-नक़्श-ओ-नवा हूँ फ़ना के साथ हूँ मैं ब-हुक्म-ए-यार लवें कब्ज़ करने आती है बुझा रही है? बुझाए हवा के साथ हूँ मैं ये साबिरीन-ए-मोहब्बत ये काशिफ़ीन-ए-जुनूँ इन्ही के संग इन्हीं औलिया के साथ हूँ मैं किसी के साथ नहीं हूँ मगर जमाल-ए-इलाहा तिरी क़िस्म तिरे हर मुब्तला के साथ हूँ मैं ज़माने भर को पता है मैं किस तरीक़ पे हूँ सभी को इल्म है किस दिल-रुबा के साथ हूँ मैं मुनाफ़िक़ीन-ए-तसव्वुफ़ की मौत हूँ मैं 'अली' हर इक असील हर इक बे-रिया के साथ हूँ मैं
Ali Zaryoun
5 likes
वो ही कर्तबा तेरी याद का, वो ही नै नवा ए ख़याल है वो ही मैं जो था तेरे हिज्र में, वो ही मशहद ए ख़द-ओ-ख़ाल है तेरी नींद किस के लिए उड़ी, मेरा ख़्वाब किस ने बुझा दिया इसे सुन कर रूख़ नहीं फेरना, तेरे मातमी का सवाल है ये मजाक़ तो नहीं हो रहा, मैं ख़ुशी से तो नहीं रो रहा कोई फिल्म तो नहीं चल रही, मेरी जान ये मेरा हाल है किसी सैय्यदा के चरण पडूं, कोई काज़मी जो दुआ करे कोई हो जो ग़म की हया करे, मेरा कर्बलाई मलाल है वो चराग़ ए शहर ए विफाक़ है, मेरे साथ जिस का फिराक़ है भले दूर पार से ही सही, मेरा राब़्ता तो बहाल है वो ख़ुशी से इतनी निहाल थी कि "अली" मैं सोच कर डर गया मैं उसे बता ही नहीं सका कि ये मेरी आख़िरी कॉल है
Ali Zaryoun
3 likes
सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को मैं रंग हूँ सो किसी मौज में मिला मुझ को मैं इन दिनों तिरी आँखों के इख़्तियार में हूँ जमाल-ए-सब्ज़ किसी तजरबे में ला मुझ को मैं बूढे जिस्म की ज़िल्लत उठा नहीं सकता किसी क़दीम तजल्ली से कर नया मुझ को मैं अपने होने की तकमील चाहता हूँ सखी सो अब बदन की हिरासत से कर रिहा मुझ को मुझे चराग़ की हैरत भी हो चुकी मालूम अब इस से आगे कोई रास्ता बता मुझ को उस इस्म-ए-ख़ास की तरकीब से बना हूँ मैं मोहब्बतों के तलफ़्फ़ुज़ से कर नया मुझ को दरून-ए-सीना जिसे दिल समझ रहा था 'अली' वो नीली आग है ये अब पता चला मुझ को
Ali Zaryoun
9 likes
हालत ए हिज्र में हूँ यार मेरी सम्त न देख तू न हो जाए गिरफ्तार, मेरी सम्त न देख आस्तीन में जो छूपे सांप हैं उन को तो निकाल अपने नुक़सान पर हर बार मेरी सम्त न देख तुझ को जिस बात का 'ख़द्शा' है वो हो सकती है ऐसे नश्शे में लगातार मेरी सम्त न देख या कोई बात सुना या मुझे सीने से लगा इस तरह बैठ कर बेकार मेरी सम्त न देख तेरा यारों से नहीं जेब से याराना है ऐ मोहब्बत के दुकाँदार मेरी सम्त न देख
Ali Zaryoun
7 likes
इसी लिए तो मुझे सुनके तैश आया है तुम्हारा हाल किसी और ने बताया है मुझे बता मेरा भाई शहीद कैसे हुआ तू उस के साथ था तू कैसे बच के आया है अभी ये ज़ख़्म किसी पर नहीं खुला मेरा अभी ये शे'र किसी को नहीं सुनाया है
Ali Zaryoun
16 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ali Zaryoun.
Similar Moods
More moods that pair well with Ali Zaryoun's ghazal.







