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तुम्हारे काम अगर आए मुस्कुराने में तो कोई हर्ज नहीं मेरे टूट जाने में फ़रोख़्त हो गई हर शय जो दिल मकान में थी मैं इतना ख़र्च हुआ हूँ उसे कमाने में मैं अपनी जान से जाऊँगा है ये सच लेकिन उसे भी ज़ख़्म तो आएँगे आज़माने में वो एक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत न बिन सका मुझ से हज़ार बार मिटा हूँ जिसे बनाने में तुम्हें तो सिर्फ़ ख़बर है चराग़ जलने की हमारे हाथ जले हैं उसे जलाने में तुम्हारे वस्ल की मस्ती थी और मय-ख़ाना शराब ले के गया था शराब-ख़ाने में इमारतों में मोहब्बत का देवता है वो हमारे हाथ कटे हैं जिसे बनाने में

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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं

Ali Zaryoun

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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एक और शख़्स छोड़ कर चला गया तो क्या हुआ हमारे साथ कौन सा ये पहली मर्तबा हुआ अज़ल से इन हथेलियों में हिज्र की लकीर थी तुम्हारा दुख तो जैसे मेरे हाथ में बड़ा हुआ मेरे ख़िलाफ़ दुश्मनों की सफ़ में है वो और मैं बहुत बुरा लगूँगा उस पर तीर खींचता हुआ

Tehzeeb Hafi

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किसी ने हाल जो पूछा कभी मोहब्बत से लिपट के रोया बहुत देर उस से शिद्दत से हमारा साथ जो छूटा तो इस में हैरत क्या हमारे हाथ तो छूटे हुए थे मुद्दत से ये और बात कि बीनाई जा चुकी मेरी तुम्हारे ख़्वाब रखे हैं मगर हिफ़ाज़त से जब उस ने भीड़ में मुझ को गले लगाया था हर एक आँख मुझे तक रही थी हैरत से ये कारोबार-ए-सियासत बहुत ही अच्छा है बस आप झूट को बेचो बड़ी सदाक़त से

Yasir Khan

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मिरी चीख़ों से कमरा भर गया था कोई कल रात मुझ में मर गया था बहुत मुश्किल है उस का लौट आना वो पूरी बात कब सुन कर गया था मुझे पहचानता भी है कोई अब मैं बस ये देखने ही घर गया था ज़माना जिस को दरिया कह रहा है हमारी आँख से बह कर गया था कई सदियों से सूखा पड़ रहा है यहाँ इक शख़्स प्यासा मर गया था हमारा बोझ था सर पर हमारे तुम्हारे साथ तो नौकर गया था ये मत समझा ख़ता किस से हुई थी बता इल्ज़ाम किस के सर गया था

Yasir Khan

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इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है यार तुम क्या हो कि हर बात से डर लगता है इश्क़ है इश्क़ कोई खेल नहीं बच्चों का वो चला जाए जिसे मात से डर लगता है मैं तिरे हुस्न का शैदाई नहीं हो सकता रोज़ बँटती हुई ख़ैरात से डर लगता है हम ने हालात बदलने की दुआ माँगी थी अब बदलते हुए हालात से डर लगता है दिल तो करता है कि बारिश में नहाएँ 'यासिर' घर जो कच्चा हो तो बरसात से डर लगता है

Yasir Khan

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हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए इतना दिख जाए कि आँखों का गुज़ारा हो जाए हम जिसे पास बिठा लें वो बिछड़ जाता है तुम जिसे हाथ लगा दो वो तुम्हारा हो जाए तुम को लगता है कि तुम जीत गए हो मुझ से है यही बात तो फिर खेल दुबारा हो जाए है मोहब्बत भी अजब तर्ज़-ए-तिजारत कि यहाँ हर दुकाँ-दार ये चाहे कि ख़सारा हो जाए

Yasir Khan

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आँखों को कुछ ख़्वाब दिखा कर मानेंगे आप हमारे होश उड़ा कर मानेंगे लगता है ये पानी बेचने वाले लोग हर बस्ती में आग लगा कर मानेंगे तुझ को छूने की चाहत में दीवाने शायद अपने हाथ जला कर मानेंगे तय तो ये था पिछली बातें भूलनी हैं आप मगर सब याद दिला कर मानेंगे घर का झगड़ा गर बाहर आ जाएगा बाहर वाले अंदर आ कर मानेंगे चाहे फिर आवाज़ चली जाए लेकिन हम उस को आवाज़ लगा कर मानेंगे घर पक्का करने की बातें करते हैं या'नी वो दीवार उठा कर मानेंगे

Yasir Khan

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