nazmKuch Alfaaz

"अपनापन" जाने क्यूँँ घर की टैरिस पर पैरों की आपाधापी जोरों पर होती है जैसे चाँद को छूने जाना है दिन दिन भर मैं धूप में ख़ुद को ऐसे सेका करता हूँ जैसे तन पर धूप रगड़ कर हीरे सा चमकाना है लेकिन वो मतवाला चाँद न जाने क्यूँँ छुप जाता है बादल के पर्दों से हो कर मुझ सेे आँख चुराता है मदमस्त हवाएँ मुझ सेे कुछ ऐसे लिपटा करती हैं जैसे टूटी कश्ती को कोई साहिल मिल जाता है बारिश की बूँदें भी मुझ को जी भर के यूँ पीती हैं उन के दिल की नदियाँ मानो इक मुद्दत से रीती हैं जाने क्या रिश्ता है ये सब इतने अपने लगते हैं अनसोई रातों के भूले बिसरे सपने लगते हैं

Aditya0 Likes

Related Nazm

"जन्मदिन मुबारक" दिन ये सोने से, रातें ये रंगीन मुबारक ऐ मेरी साँसों की रवानी तुझ को तेरा जन्मदिन मुबारक भवरें मुस्काएँ, फूलों की डाली-डाली हँसें जब तू मुस्काए, तेरे होंठों की लाली हँसें मेरा कत़्ल करे, तेरे नैन कजरारे काले मजरूह हुए ना जाने कितने मतवाले तुझ को ये बहारें शौकीन मुबारक ऐ मेरी तसव्वुर की रानी तुझ को तेरा जन्मदिन मुबारक

Vikas Sangam

15 likes

"दोस्त" ये बात तुझ सेे छुपी नहीं तू रूह है मेरी साया नहीं तू ने ये कैसे कह दिया तू दोस्त है हम सफ़र नहीं क्यूँँ तुझे आता समझ नहीं तू राह है मेरी मंज़िल नहीं

ALI ZUHRI

11 likes

"रम्ज़" तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया है मुझ पर इन में इक रम्ज़ है जिस रम्ज़ का मारा हुआ ज़ेहन मुज़्दा-ए-इशरत-ए-अंजाम नहीं पा सकता ज़िंदगी में कभी आराम नहीं पा सकता

Jaun Elia

216 likes

"याद है पहले रोज़ कहा था" याद है पहले रोज़ कहा था फिर न कहना ग़लती दिल की प्यार समझ के करना लड़की प्यार निभाना होता है फिर पार लगाना होता है याद है पहले रोज़ कहा था साथ चलो तो पूरे सफ़र तक मर जाने की अगली ख़बर तक समझो यार ख़ुदा तक होगा सारा प्यार वफ़ा तक होगा फिर ये बंधन तोड़ न जाना छोड़ गए तो फिर न आना छोड़ दिया जो तेरा नहीं है चला गया जो मेरा नहीं है याद है पहले रोज़ कहा था या तो टूट के प्यार न करना या फिर पीठ पे वार न करना जब नादानी हो जाती है नई कहानी हो जाती है नई कहानी लिख लाऊँगा अगले रोज़ मैं बिक जाऊँगा तेरे गुल जब खिल जाएँगे मुझ को पैसे मिल जाएँगे याद है पहले रोज़ कहा था बिछड़ गए तो मौज उड़ाना वापस मेरे पास न आना जब कोई जा कर वापस आए रोए तड़पे या पछताए मैं फिर उस को मिलता नहीं हूँ साथ दोबारा चलता नहीं हूँ गुम जाता हूँ खो जाता हूँ मैं पत्थर का हो जाता हूँ

Khalil Ur Rehman Qamar

191 likes

“ख़ुदा अब मुझे चैन मिलता नहीं है” न आराम अब मुझ को इक पल भी यारों मुझे याद आया था वो कल भी यारों वो यारों मेरे साथ क्यूँँ कर गया ये कोई तो दवा हो जो आराम दे दे मैं दफ़्तर के पहिये में पिसने लगा हूँ हैं हाथों में पत्थर मैं ख़ुद आइना हूँ वो तारों से आगे मैं धरती के अंदर बना है वो पागल जो कल था सिकंदर वो कल था जहाँ पर वो अब भी वहीं है ख़ुदा अब मुझे चैन मिलता नहीं है मैं बरसों से दर दर भटकता रहा हूँ मैं बेचैन भी हूँ मैं बे-आसरा हूँ नए ज़ख़्म फिर से है लाई मोहब्बत कि जब से हुई है परायी मोहब्बत मोहब्बत का मुझ को सिला ये मिला है दिवानों का अब साथ में क़ाफ़िला है सुकूँ ढूँढ़ते ढूँढ़ते थक गया हूँ मैं दुनिया से आगे फ़लक तक गया हूँ ये दिल है कहीं और धड़कन कहीं है ख़ुदा अब मुझे चैन मिलता नहीं है

Amaan Pathan

7 likes

More from Aditya

“मुझ में बाकी तुम” कभी तन्हाइयों में जब हमें तुम याद आते हो जुदा होते हुए भी साथ में लम्हे बिताते हो तुम्हें कैसे भुला दूँ मैं तुम्हें फिर क्यूँ भुला दूँ मैं कभी जब डूबने लगता हूँ दुनिया के फसानों में तुम्हीं यादों में आ कर फिर मुझे साहिल पे लाते हो तुम्हें कैसे भुला दूँ मैं तुम्हें फिर क्यूँ भुला दूँ मैं हमारे इश्क़ के चर्चे अगर होते हैं महफ़िल में नमी आँखों में ला कर के हमें भी तुम रुलाते हो तुम्हें कैसे भुला दूँ मैं तुम्हें फिर क्यूँ भुला दूँ मैं मुझे ये वक़्त चुभता है कभी जब खार के जैसे मेरे जख्मों पे चुपके से तुम्हीं गुलशन सजाते हो तुम्हें कैसे भुला दूँ मैं तुम्हें फिर क्यूँ भुला दूँ मैं

Aditya

1 likes

अभी अभी की बात है अभी अभी तो मुहब्बत खिली ही थी मुझ में अभी अभी मेरे दिल को करार आया था अभी अभी तो समझ पाए इश्क़ मेरा तुम अभी अभी तो तुम्हें मुझ पे प्यार आया था अभी अभी तो बहुत दूर जाना था हम को अभी सफ़र की शुरुआत होने वाली थी वो देर रात की बातें शुरू हुईं थी अभी अभी तो दिल में छिपी बात होने वाली थी अभी तो राज कई बांटने को थे बाकी अभी तो ख़्वाब कई बांटने को थे बाकी अभी तो रात में रोने की रस्म थी बाकी अभी तो नींद को खोने की रस्म थी बाकी वो रूठने का मनाने का सिलसिला होता हमारे चैन का बस तू ही मरहला होता हमारे कमरे में तस्वीर बस तेरी होती मुझे दु'आओं के एवज़ में तू मिली होती मगर ये ठीक किया तुम ने छोड़ कर मुझ को हमारे हाल पे तन्हा सा छोड़ कर मुझ को मैं शा'इरी के सिवा और क्या तुम्हें देता हमारी जेब में ग़ज़लों के बा'द कुछ भी नहीं बस इक क़लम के सिवा मेरे हात कुछ भी नहीं तू ये न सोचना हम तुझ को बद-दुआ देंगे अगर तू ख़त्म भी कर दे तो बस दुआ देंगे

Aditya

2 likes

अधूरा सफ़र तुम्हारे ख़्वाब की प्यासी मेरी आँखें ने पूछा है कि मैं ने टूटते तारों से तुम को क्यूँ नहीं माँगा ख़ुदा के दर पे जा कर अपने सर को क्यूँ नहीं फोड़ा उन्हें लगता है मुझ को इश्क़ करना ही नहीं आया तुम इक दिन रू-ब-रू आ कर कोई क़िस्सा सुना दो ना मुझे तो कुछ समझ आता नहीं उन को बताएं क्या गुजरते वक़्त रस्तों से दरख़्तों ने मुझे टोका कि जिन के छांव में हम ने कभी सपने उगाए थे खिजां सी छा गई उन पर अकेला देख कर मुझ को बहुत अफ़सोस था उन को कि अपने इश्क़ के सपने मुहब्बत की बहारों के बिना वो टूट कर बिखरे सितारे काली रातों के अमावस का वो काला चाँद अभी भी तुझ सेे मेरे बस्ल के सपने सजाते हैं यक़ीं उन को है अब भी फिर से तू मेरी हो जाएगी मगर मुझ को नहीं लगता कि अब तेरा इरादा है अगर तेरा इरादा हो भी जाए फिर भी मत आना अगर तुम लौट के आए तो फिर जाने नहीं दूँगा परिंदे की तरह तुम को मैं ख़ुद में क़ैद कर लूंगा सफ़र वो जिन को मिल कर के हमें अंजाम देना था मुकम्मल इश्क़ कर, जिन को हमें ईनाम देना था हमारी राह तकते आँख से महरूम हो बैठे भटकते फिर रहें हैं अब किसी अंजान रस्ते पर सभी से पूछते तेरी गली तेरा पता-ओ-दर उन्हें लगता है ये तू बात उन की मान जाएगी हमारी ज़िन्दगी में फिर तू वापस लौट आएगी

Aditya

2 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Aditya.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Aditya's nazm.