"कुछ तो है" बात सिर्फ़ मोहब्बत की होती तो कब के भूल गए होते मगर कुछ अधूरे सपने हैं जो सोने नहीं देते सोचता हूँ के बस बंद कर दूँ मैं लिखना हमारी दास्तान मगर कुछ अधूरे क़िस्से हैं जो कहानी पूरी होने नहीं देते
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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे जो इश्क़ को काम समझते थे या काम से आशिक़ी करते थे हम जीते-जी मसरूफ़ रहे कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया काम इश्क़ के आड़े आता रहा और इश्क़ से काम उलझता रहा फिर आख़िर तंग आ कर हम ने दोनों को अधूरा छोड़ दिया
Faiz Ahmad Faiz
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मैं सिगरेट तो नहीं पीता मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ कि "माचिस है?" बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.
Gulzar
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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है
Ali Zaryoun
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मेरा संसार मेरे मन का सुकून भी तुम हो, तुम ही मेरी मंज़िल उस का जुनून भी तुम हो, मेरा दिन भी तुम हो, मेरी रात भी तुम हो, मेरी नींद भी तुम हो, मेरे जज़्बात भी तुम हो, मेरा हर लम्हा तुम हो, मेरे हालात भी तुम हो, मेरा जीवन भी तुम हो, इस की मस्ती भी तुम हो, हूँ अगर मैं मँझधार तो, फिर इस की कश्ती भी तुम हो, अगर हूँ मैं शरीर तो, इस की अस्थि भी तुम हो, और हूँ अगर मैं आत्मा तो, इस की मुक्ति भी तुम हो, मेरा वैराग्य भी तुम हो, मेरी आसक्ति भी तुम हो, मेरा ईश्वर भी तुम हो, मेरी भक्ति भी तुम हो, मैं अगर दिल हूँ तो, इस की धड़कन भी तुम हो, मेरी हर बात तुम हो, मेरी तड़पन भी तुम हो, मेरी स्वतंत्रता भी तुम हो, मेरा बंधन भी तुम हो, मेरा सुख भी तुम हो, मेरी मुस्कान भी तुम हो, मेरा दुख भी तुम हो, मेरा सम्मान भी तुम हो, मेरा बल भी तुम हो, मेरा स्वाभिमान भी तुम हो, मेरी प्रार्थना भी तुम हो, मेरा अभिमान भी तुम हो, मेरा हर काम भी तुम हो, थक जाऊँ तो आराम भी तुम हो, भेजे हैं तुझ को चाँद के हाथों, वो सारे पैग़ाम भी तुम हो, साँसों में बस तेरा नाम है, मेरा तो अंजाम भी तुम हो, मेरा तो आधार ही तुम हो, मेरी तो सरकार ही तुम हो, मेरी तो फ़कीरी भी तुम हो, ख़ज़ाने का अंबार भी तुम हो, मेरे लबों का मौन भी तुम हो, मेरे दिल की पुकार भी तुम हो, मेरी तो कुटिया भी तुम हो, मेरा राज-दरबार भी तुम हो, मेरा हर विकार भी तुम हो, मेरा तो श्रृंगार भी तुम हो, मेरी जीत-हार भी तुम हो, मेरा गुस्सा-प्यार भी तुम हो, मेरा तो घर बार ही तुम हो, जीने के आसार ही तुम हो, कैसे मैं बताऊ तुझे, तुम्हारे बिन मैं कुछ भी नहीं, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो।
Divya 'Kumar Sahab'
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''प्यारे दादा'' तू गया तो जैसे दिल का क़रार चला गया तेरे साथ वो तेरा सारा प्यार चला गया तू नहीं जानता तेरे बा'द क्या ख़सारा हुआ आँखें दरिया हो गईं दिल बेचारा हुआ वो जो किसी चमन में बहार के जैसा था मेरे सर से तेरे साया चला गया वो ज़िन्दगी का क़ीमती सरमाया चला गया तेरे साथ ही कई राजे और रानियाँ चली गईं तू गया तो तेरे साथ कहानियाँ चली गईं मुझे याद है तेरे साथ जो मेले देखे थे सुख सबने दुख तू ने अकेले देखे थे वो ख़ुशी याद हैं जो तेरे खेत से वापस आने की होती थी वो तेरे प्यार से बुलानी की होती थी वो तेरे दिए हुए बोसे की बात कुछ और थी वो जेब ख़र्ची को दिए हर सिक्के की बात कुछ और थी फ़िलहाल तो तू नहीं पर तेरी दुआएँ साथ हैं तेरी यादें तेरी सिखाई बातें साथ हैं बस ख़ुदा से यही दुआ है के तुझे अपनी अमान में रक्खे तू जहाँ रहे ख़ुश रहे, बस यही मेरी दुआ है कभी कभी सपने में आ कर रू-दाद बता जाना बस और मेरे दिल को चाहिए क्या है
Prince
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"जुस्तजु" निकला ख़ुशी की जुस्तजु में देखा तो 'अज़ाबो में मिली इक शह थी जो सुकून नाम की देखा तो ख़राबो में मिली बरसों से थी कोशिश जिस चेहरे को भूल जाने की बहुत रोए जब इक तस्वीर किताबों में मिली क़सम ख़ुदा की ये ज़ख़्म मुझे किसी तेघ से नहीं मिले ये तो प्यार की निशानी है जो उस के दिए गुलाबों से मिली और मेरे लिखने के फन को मेरी किस्मत ना कहना ये तो अता है जो उस के झूठे वादों से मिली
Prince
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"बे-वफ़ा सनम" कभी किसी बे-वफ़ा से वफ़ा कर के तो दिखा किसी जाते हुए के लिए, आँखें भरके तो दिखा जीना तो बहुत आसान होता, है किसी के लिए मगर किसी मरते हुए के लिए, जाना मर के तो दिखा मुझे तेरी क़सम मोहब्बत के लिए अपना नज़रिया , बदल दूँगा मुझे किसी एक, से वफ़ा कर के तो दिखा और कैसे मान ले हम, तेरी शीशा -गरी के हुनर को जाना इस टूटे दिल को फिर से, ज़िन्दा कर के तो दिखा
Prince
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