nazmKuch Alfaaz

"बे-वफ़ा सनम" कभी किसी बे-वफ़ा से वफ़ा कर के तो दिखा किसी जाते हुए के लिए, आँखें भरके तो दिखा जीना तो बहुत आसान होता, है किसी के लिए मगर किसी मरते हुए के लिए, जाना मर के तो दिखा मुझे तेरी क़सम मोहब्बत के लिए अपना नज़रिया , बदल दूँगा मुझे किसी एक, से वफ़ा कर के तो दिखा और कैसे मान ले हम, तेरी शीशा -गरी के हुनर को जाना इस टूटे दिल को फिर से, ज़िन्दा कर के तो दिखा

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"बन्दा और ख़ुदा" एक मुख़्तसर सी कहानी है जो ज़फ़र कि मुँह-ज़बानी है ये हुकूमत आसमानी है हर मख़्लूक़ रूहानी है ये ख़ुदा की मेहरबानी है की सज्दों में झुकती पेशानी है ये सारी दुनिया फ़ानी है हर शख़्स को मौत आनी है ये इंसानियत अय्याशी की दीवानी है हर शख़्स की ढलती जवानी है क़ुदरत की पकड़ से कोई नहीं बचा ये आ रहे अज़ाब क़यामत की निशानी है ये लोगों की गुमराही और बड़ी नादानी है की कहाँ ऊपर ख़ुदा को शक्ल हमें दिखानी है

ZafarAli Memon

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भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ मुर्दा-दिली का झंडा फेंको ज़मीन पर तुम ज़िंदा-दिली का हर-सू परचम उड़ाए जाओ लाओ न भूल कर भी दिल में ख़याल-ए-पस्ती ख़ुश-हाली-ए-वतन का बेड़ा उठाए जाओ तन-मन मिटाए जाओ तुम नाम-ए-क़ौमीयत पर राह-ए-वतन में अपनी जानें लड़ाए जाओ कम-हिम्मती का दिल से नाम-ओ-निशाँ मिटा दो जुरअत का लौह-ए-दिल पर नक़्शा जमाए जाओ ऐ हिंदूओ मुसलमाँ आपस में इन दिनों तुम नफ़रत घटाए जाओ उल्फ़त बढ़ाए जाओ 'बिक्रम' की राज-नीती 'अकबर' की पॉलीसी की सारे जहाँ के दिल पर अज़्मत बिठाए जाओ जिस कश्मकश ने तुम को है इस क़दर मिटाया तुम से हो जिस क़दर तुम उस को मिटाए जाओ जिन ख़ाना-जंगियों ने ये दिन तुम्हें दिखाए अब उन की याद अपने दिल में भुलाए जाओ बे-ख़ौफ़ गाए जाओ ''हिन्दोस्ताँ हमारा'' और ''वंदे-मातरम'' के नारे लगाए जाओ जिन देश सेवकों से हासिल है फ़ैज़ तुम को इन देश सेवकों की जय जय मनाए जाओ जिस मुल्क का हो खाते दिन रात आब-ओ-दाना उस मलक पर सरों की भेटें चढ़ाए जाओ फाँसी का जेल का डर दिल से 'फ़लक' मिटा कर ग़ैरों के मुँह पे सच्ची बातें सुनाते जाओ

Lal Chand Falak

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"नज़्म क्या है" शा'इरी की दो सिंफ़ें हैं नज़्म-ओ-ग़ज़ल उर्दू में इन की शोहरत है बच्चो अटल नज़्म पाबंद है नज़्म आज़ाद भी ये कभी नस्र है और मुअर्रा कभी नज़्म-ए-पाबंद में वज़्न होगा म्याँ और आज़ाद में भी है इस का निशाँ नज़्म-ए-पाबंद का तर्ज़ है जो लतीफ़ इस में पाओगे तुम क़ाफ़िया-ओ-रदीफ़ नसरी नज़्मों में बस नस्र ही नस्र है वज़्न और क़ाफ़िया है न ही बहर है वज़्न और क़ाफ़िए जिन को मुश्किल हुए नसरी नज़्में उमूमन वो कहते लगे वज़्न नज़्म-ए-मुअर्रा में है दोस्तो इस को तुम बे-रदीफ़-ओ-क़वाफ़ी कहो मसनवी हो क़सीदा हो या मर्सिया नज़्म का मिलता है बच्चो हम को पता नज़्म में सिलसिला है ख़यालात का एक दरिया सा है देखो जज़्बात का वो मुख़म्मस हो या हो मुसद्दस कोई ये भी इक शक्ल है नज़्म-ए-पाबंद की वो ग़ज़ल हो कि हो नज़्म बच्चो सुनो दोनों यकसाँ हैं शोहरत में बस जान लो 'जोश' की नज़्में मशहूर हैं हर जगह हैं ग़ज़ल के 'जिगर' वाक़ई बादशह नज़्म में जो कहानी कही जाएगी शौक़ से ऐ मियाँ वो सुनी जाएगी नज़्में सीमाब-ओ-इक़बाल ने भी लिखीं जो निहायत ही मशहूर साबित हुईं करता हूँ बच्चों के वास्ते मैं दुआ नज़्में बच्चों की लिखता हूँ 'हाफ़िज़' सदा

Amjad Husain Hafiz Karnataki

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मुझ को इतने से काम पे रख लो जब भी सीने में झूलता लॉकेट उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से सीधा करता रहूँ उस को जब भी आवेज़ा उलझे बालों में मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो 'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।' जब ग़रारे में पाँव फँस जाए या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके इक नज़र देख लो तो काफ़ी है 'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा मुझ को इतने से काम पे रख लो

Gulzar

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"मशवरा" बदलेंगे लोग बदलेंगे उन के तेवर भी जाने अनजाने में हर तेवर समझता हूँ मैं अपने अलफ़ाज़ को दिल-ओ-दिमाग़ से लिखता हूँ दिल टूटा आशिक़ हूँ हर रंग को परखता हूँ अपनी उन हरकत और बे-वजह प्यार पर होने पर एक शाम ख़ुद में कहीं खटकता हूँ तस्वीर को देख कर तेरी ले कर तेरा नाम उन पुरानी याद में हर रोज़ कहीं भटकता हूँ तेरी सब चीज़ और सब तोहफ़ों को ख़ूब उनहें सँवार कर और सँभाले रखता हूँ भूल कर तुझ को अपने मन से रद्द कर के तेरी यादें शुरू करने एक नई ज़िंदगी सुब्ह-सवेरे निकलता हूँ बे-वफ़ा मैं न तुझे कहूँगा न ही ख़ुद को मतलबी रहो हमेशा तुम ख़ुशहाल मिन्नतें इस की करता हूँ मशवरा-ए-ज़फ़र सुन लो दोस्तों आज मैं तुम को कहता हूँ पहले राज़ी वालिदैन को बा'द ही इश्क़ करना रोज़ ऐसे कितने आशिक़ों मैं देखता बिछड़ता हूँ

ZafarAli Memon

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''प्यारे दादा'' तू गया तो जैसे दिल का क़रार चला गया तेरे साथ वो तेरा सारा प्यार चला गया तू नहीं जानता तेरे बा'द क्या ख़सारा हुआ आँखें दरिया हो गईं दिल बेचारा हुआ वो जो किसी चमन में बहार के जैसा था मेरे सर से तेरे साया चला गया वो ज़िन्दगी का क़ीमती सरमाया चला गया तेरे साथ ही कई राजे और रानियाँ चली गईं तू गया तो तेरे साथ कहानियाँ चली गईं मुझे याद है तेरे साथ जो मेले देखे थे सुख सबने दुख तू ने अकेले देखे थे वो ख़ुशी याद हैं जो तेरे खेत से वापस आने की होती थी वो तेरे प्यार से बुलानी की होती थी वो तेरे दिए हुए बोसे की बात कुछ और थी वो जेब ख़र्ची को दिए हर सिक्के की बात कुछ और थी फ़िलहाल तो तू नहीं पर तेरी दुआएँ साथ हैं तेरी यादें तेरी सिखाई बातें साथ हैं बस ख़ुदा से यही दुआ है के तुझे अपनी अमान में रक्खे तू जहाँ रहे ख़ुश रहे, बस यही मेरी दुआ है कभी कभी सपने में आ कर रू-दाद बता जाना बस और मेरे दिल को चाहिए क्या है

Prince

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"जुस्तजु" निकला ख़ुशी की जुस्तजु में देखा तो 'अज़ाबो में मिली इक शह थी जो सुकून नाम की देखा तो ख़राबो में मिली बरसों से थी कोशिश जिस चेहरे को भूल जाने की बहुत रोए जब इक तस्वीर किताबों में मिली क़सम ख़ुदा की ये ज़ख़्म मुझे किसी तेघ से नहीं मिले ये तो प्यार की निशानी है जो उस के दिए गुलाबों से मिली और मेरे लिखने के फन को मेरी किस्मत ना कहना ये तो अता है जो उस के झूठे वादों से मिली

Prince

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"कुछ तो है" बात सिर्फ़ मोहब्बत की होती तो कब के भूल गए होते मगर कुछ अधूरे सपने हैं जो सोने नहीं देते सोचता हूँ के बस बंद कर दूँ मैं लिखना हमारी दास्तान मगर कुछ अधूरे क़िस्से हैं जो कहानी पूरी होने नहीं देते

Prince

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