वा'दा किया था आप ने मुझ से यक-शंबा को खीर पकेगी आज है शंबा याद दिला दूँ ज़ेहन में ताज़ा बात रहेगी प्यारी अम्मी भूल न जाना वा'दा किया था आप ने मुझ से यक-शंबा को पैसे मिलेंगे आज है शंबा याद दिला दूँ वर्ना पैसे कैसे मिलेंगे प्यारे अब्बू भूल न जाना वा'दा किया था आप ने मुझ से यक-शंबा को सैर करेंगे आज है शंबा याद दिला दूँ वर्ना कैसे याद रखेंगे प्यारे भय्या भूल न जाना वा'दा किया था आप ने मुझ से यक-शंबा को काम न देंगी आज है शंबा याद दिला दूँ प्यारी बाजी ख़ूब हँसेंगी प्यारी बाजी भूल न जाना
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''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए
Amir Ameer
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"रम्ज़" तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया है मुझ पर इन में इक रम्ज़ है जिस रम्ज़ का मारा हुआ ज़ेहन मुज़्दा-ए-इशरत-ए-अंजाम नहीं पा सकता ज़िंदगी में कभी आराम नहीं पा सकता
Jaun Elia
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"याद है पहले रोज़ कहा था" याद है पहले रोज़ कहा था फिर न कहना ग़लती दिल की प्यार समझ के करना लड़की प्यार निभाना होता है फिर पार लगाना होता है याद है पहले रोज़ कहा था साथ चलो तो पूरे सफ़र तक मर जाने की अगली ख़बर तक समझो यार ख़ुदा तक होगा सारा प्यार वफ़ा तक होगा फिर ये बंधन तोड़ न जाना छोड़ गए तो फिर न आना छोड़ दिया जो तेरा नहीं है चला गया जो मेरा नहीं है याद है पहले रोज़ कहा था या तो टूट के प्यार न करना या फिर पीठ पे वार न करना जब नादानी हो जाती है नई कहानी हो जाती है नई कहानी लिख लाऊँगा अगले रोज़ मैं बिक जाऊँगा तेरे गुल जब खिल जाएँगे मुझ को पैसे मिल जाएँगे याद है पहले रोज़ कहा था बिछड़ गए तो मौज उड़ाना वापस मेरे पास न आना जब कोई जा कर वापस आए रोए तड़पे या पछताए मैं फिर उस को मिलता नहीं हूँ साथ दोबारा चलता नहीं हूँ गुम जाता हूँ खो जाता हूँ मैं पत्थर का हो जाता हूँ
Khalil Ur Rehman Qamar
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"तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे" तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी और ही तरह की आँखें थी तेरे चेहरे पर तू किसी और सितारे से चमक लाई थी तेरी आवाज़ ही सब कुछ थी मुझे मोनिस-ए-जाँ क्या करुँ मैं कि तू बोली ही बहुत कम मुझ सेे तेरी चुप से ही यही महसूस किया था मैं ने जीत जाएगा तेरा ग़म किसी रोज़ मुझ सेे शहर आवाज़ें लगाता था मगर तू चुप थी ये तअल्लुक़ मुझे खाता था मगर तू चुप थी वही अंजाम था जो इश्क़ का आगाज़ से है तुझ को पाया भी नहीं था कि तुझे खोना था चली आती है यही रस्म कई सदियों से यही होता है, यही होगा, यही होना था पूछता रहता था तुझ सेे कि “बता क्या दुख है?” और मेरी आँख में आँसू भी नहीं होते थे मैं ने अंदाज़े लगाए के सबब क्या होगा पर मेरे तीर तराजू भी नहीं होते थे जिस का डर था मुझे मालूम पड़ा लोगों से फिर वो ख़ुश-बख़्त पलट आया तेरी दुनिया में जिस के जाने पे मुझे तू ने जगह दी दिल में मेरी क़िस्मत में ही जब ख़ाली जगह लिखी थी तुझ सेे शिकवा भी अगर करता तो कैसे करता मैं वो सब्ज़ा था जिसे रौंद दिया जाता है मैं वो जंगल था जिसे काट दिया जाता है मैं वो दर्द था जिसे दस्तक की कमी खाती है मैं वो मंज़िल था जहाँ टूटी सड़क जाती है मैं वो घर था जिसे आबाद नहीं करता कोई मैं तो वो था जिसे याद नहीं करता कोई ख़ैर इस बात को तू छोड़, बता कैसी है? तू ने चाहा था जिसे, वो तेरे नज़दीक तो है? कौन से ग़म ने तुझे चाट लिया अंदर से आज कल फिर से तू चुप रहती है, सब ठीक तो है?
Tehzeeb Hafi
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राइगानी मैं कमरे में पिछले इकत्तीस दिनों से फ़क़त इस हक़ीक़त का नुक़सान गिनने की कोशिश में उलझा हुआ हूँ कि तू जा चुकी है तुझे राइगानी का रत्ती बराबर अंदाज़ा नहीं है तुझे याद है वो ज़माना जो कैम्पस की पगडंडियों पे टहलते हुए कट गया था तुझे याद है कि जब क़दम चल रहे थे कि एक पैर तेरा था और एक मेरा क़दम वो जो धरती पे आवाज़ देते कि जैसे हो रागा कोई मुतरीबों का क़दम जैसे के सा पा गा मा पा गा सा रे वो तबले की तिरखट पे तक धिन धिनक धिन तिनक धिन धना धिन बहम चल रहे थे, क़दम चल रहे थे क़दम जो मुसलसल अगर चल रहे थे तो कितने गवइयों के घर चल रहे थे मगर जिस घड़ी तू ने उस राह को मेरे तन्हा क़दम के हवाले किया उन सुरों की कहानी वहीं रुक गई कितनी फनकारियाँ कितनी बारीकियाँ कितनी कलियाँ बिलावल गवईयों के होंठों पे आने से पहले फ़ना हो गए कितने नुसरत फ़तह कितने मेहँदी हसन मुन्तज़िर रह गए कि हमारे क़दम फिर से उठने लगें तुझ को मालूम है जिस घड़ी मेरी आवाज़ सुन के तू इक ज़ाविये पे पलट के मुड़ी थी वहाँ से, रिलेटिविटी का जनाज़ा उठा था कि उस ज़ाविये की कशिश में ही यूनान के फ़लसफ़े सब ज़मानों की तरतीब बर्बाद कर के तुझे देखने आ गए थे कि तेरे झुकाव की तमसील पे अपनी सीधी लकीरों को ख़म दे सकें अपनी अकड़ी हुई गर्दनों को लिए अपने वक़्तों में पलटें, जियोमैट्री को जन्म दे सकें अब भी कुछ फलसफ़ी अपने फीके ज़मानों से भागे हुए हैं मेरे रास्तों पे आँखें बिछाए हुए अपनी दानिस्त में यूँँ खड़े हैं कि जैसे वो दानिश का मम्बा यहीं पे कहीं है मगर मुड़ के तकने को तू ही नहीं है तो कैसे फ्लोरेन्स की तंग गलियों से कोई डिवेन्ची उठे कैसे हस्पानिया में पिकासु बने उन की आँखों को तू जो मुयस्सर नहीं है ये सब तेरे मेरे इकट्ठे ना होने की क़ीमत अदा कर रहे हैं कि तेरे ना होने से हर इक ज़मा में हर एक फ़न में हर एक दास्ताँ में कोई एक चेहरा भी ताज़ा नहीं है तुझे राइगानी का रत्ती बराबर अंदाज़ा नहीं है
Sohaib Mugheera Siddiqi
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नमाज़ को जो जाओगे ख़ुदा का क़ुर्ब पाओगे कहेंगे तुम को नेक सब मिलेगा तुम को प्यारा रब उठो उठो नमाज़ को चलो चलो नमाज़ को है मुख़्तसर सी ज़िंदगी नहीं है अच्छी काहिली ख़ुदा का उठ के नाम लो चलो तो सब ये कहो उठो उठो नमाज़ को चलो चलो नमाज़ को वुज़ू करो वुज़ू करो मगर ध्यान ये रखो वुज़ू से तन भी साफ़ हो वुज़ू से मन भी साफ़ हो उठो उठो नमाज़ को चलो चलो नमाज़ को सदा रखें ये ध्यान अब कि ख़त्म हो अज़ान जब हर एक काम छोड़ दें ख़ुदा से दिल को जोड़ लें उठो उठो नमाज़ को चलो चलो नमाज़ को
Aadil Aseer Dehlvi
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पढ़ना लिखना सिखाए अच्छी राह बताए बद से हमें बचाए अच्छा बच्चा बनाए भय्या प्यारा प्यारा घंटी ख़ूब बजाए बस्ता भी लटकाए मकतब ले कर जाए जल्दी से पहुँचाए रिक्शा प्यारा प्यारा फूलों पर इतराए ख़ुशबू भी बिखराए घर आँगन महकाए हरियाली भी लाए गमला प्यारा प्यारा भय्या ले कर जाए सर्कस भी दिखलाए लड्डू भी खिलवाए जो चाहो मिल जाए मेला प्यारा प्यारा जब जब ये लहराए सब की शान बढ़ाए जिस के हाथ ये आए आगे बढ़ता जाए झंडा प्यारा प्यारा तारीकी में आए बिस्तर तक पहुँचाए लोरी भी सुनवाये सपने भी दिखलाए सोना प्यारा प्यारा सब को मार भगाए जो देखे डर जाए उल्टी शामत लाए दुश्मन कोई आए डंडा प्यारा प्यारा बारिश में काम आए बाहर ले कर जाए ख़ुद तो भीगा जाए लेकिन हमें बचाए छाता प्यारा प्यारा जगमग रूप दिखाए चंदा रीझा जाए रस्ता भी बतलाए लेकिन हाथ न आए तारा प्यारा प्यारा तल कर मुन्ना खाए ख़ागीना बनवाए सालन में पक जाए मुन्नी को ललचाए अण्डा प्यारा प्यारा जब ये मौसम आए सहत ख़ूब बनाए ढेरों कपड़े लाए फिर भी दूर न जाए जाड़ा प्यारा प्यारा खाना जब भी आए आगे बढ़ कर लाए हम को सब खिलवाए ख़ुद भूका रह जाए चमचा प्यारा प्यारा बाज़ारों में निकले हाथ में सब के लटके जो कुछ भी ये देखे अपने पेट में रखे थैला प्यारा प्यारा मीठा मीठा खाओ मुन्ना बोले लाओ जल्दी से पकवाओ सारा चट कर जाओ हलवा प्यारा प्यारा चाहे कोई बुलाए सब की गोद में जाए देखे तो ललचाए टॉफ़ी बिस्कुट चाय नन्हा प्यारा प्यारा पानी ठंडा कर दे सर पे कटोरा रखे दौड़े आएँ प्यारे जो चाहे वो पी ले मटका प्यारा प्यारा सूरत रंग बिरंगी हालत भी है अच्छी बिस्तर का है साथी आदत में है नर्मी तकिया प्यारा प्यारा गर्मी दूर भगाए ठंडा मौसम लाए थोड़ी बिजली खाए बेहतर काम बनाए पंखा प्यारा प्यारा चम चम चमका जाए बिजली सा लहराए जल्दी जल्दी आए साथ में चलता जाए जूता प्यारा प्यारा सब से पहले जागे पेड़ पे चढ़ के बैठे दीवारों पर भागे कुकड़ूँ कुकड़ूँ चीख़े मुर्ग़ा प्यारा प्यारा घर में दौड़ लगाए बाहर भाग के जाए बिल्ली पर ग़ुर्राए नन्हे को बहलाए कुत्ता प्यारा प्यारा पीठ पे हमें बिठाए सरपट दौड़ के जाए मंज़िल पर पहुँचाए तब जा कर सुसताए घोड़ा प्यारा प्यारा जल्दी से उठ जाए चीख़े और चिल्लाए दाना पत्ते खाए फिर भूका रह जाए बकरा प्यारा प्यारा पिंजरे में पर तोले ठुमक ठुमक कर डोले जब भी मुँह को खोले मीठी बोली बोले तोता पियारे प्यारा रुई को लिपटाए धागा बनता जाए हाथों में बल खाए बल खा कर लहराए तकला प्यारा प्यारा चोरों से लड़ जाए डाकू से टकराए जो भी चाबी लाए उस के बस में आए ताला प्यारा प्यारा सड़कें भी दिखलाए गलियों में ले जाए कौन किधर को जाए भेद ये सब बतलाए नक़्शा प्यारा प्यारा कलियों पर मंड लाए फूलों से बतलाए नाचे झू में गाए मस्ती में लहराए भौंरा प्यारा प्यारा शब को मुँह दिखलाए सूरज से शरमाए बादल में छुप जाए रात होते ही आए चंदा प्यारा प्यारा झील के पास ही बैठे छोटी मछली पकड़े हंस हो कोई जैसे मोती खाने आए बगुला प्यारा प्यारा आँखों से लग जाए राहत ही पहुँचाए काले काले शीशे अब्र के टुकड़ों जैसे चश्मा प्यारा प्यारा मेरा हमदम साथी ऐसा न होगा कोई सूरत भी है प्यारी सीरत भी है अच्छी बस्ता प्यारा प्यारा वक़्त पे सो कर उठे वक़्त पे अपने खेले वक़्त पे पढ़ने जाए अव्वल नंबर आए बच्चा प्यारा प्यारा
Aadil Aseer Dehlvi
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नादाँ कोई इक रोज़ जो जंगल में गया अख़रोट के बाग़ात का मंज़र देखा है कितना बड़ा पेड़ तो फल छोटा सा ये सोच के वो और भी हैरान हुआ इस इतने बड़े पेड़ पे नन्हा सा फल तरबूज़ यहाँ होता तो क्या अच्छा था तरबूज़ को देखो तो ज़रा सी है बेल क़ुदरत ने दिखाए हैं तमाशे क्या क्या तरबूज़ कहाँ और कहाँ ये अख़रोट क्या भेद है मेरी न समझ में आया इस सोच में था कि इक हवा का झक्कड़ आँधी सा बगूला सा बिफर कर उट्ठा जंगल के दरख़्तों को हिला कर उस ने अख़रोट को नादान के सर पर फेंका सर पर पड़ा अख़रोट तो चीख़ा नादान तरबूज़ जो होता तो मैं मर ही जाता हिकमत से कोई काम नहीं है ख़ाली जिस को भी जहाँ तू ने किया है पैदा उस की जगह उस ने नहीं बेहतर कोई अब राज़ ये मेरी भी समझ में आया
Aadil Aseer Dehlvi
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अक्सर हमारे ख़्वाब में आती हैं टॉफ़ियाँ खुल जाए फिर जो आँख सताती हैं टॉफ़ियाँ तक़रीब घर में हो कोई स्कूल का हो जश्न मौक़ा मिले तो रंग जमाती हैं टॉफ़ियाँ खाएँ मज़े मज़े से बड़े भाई जान भी बाजी भी ख़ूब शौक़ से खाती हैं टॉफ़ियाँ अब्बा भी ले के आते हैं चीज़ें नई नई अम्मी भी मार्किट से तो लाती हैं टॉफ़ियाँ बिल्ली को ख़्वाब क्या नज़र आता है क्या कहीं हम को तो ख़्वाब में नज़र आती हैं टॉफ़ियाँ मैडम हमारी अच्छी हैं स्कूल की सभी अच्छी हैं सब से वो जो खिलाती हैं टॉफ़ियाँ देखें जो टॉफ़ियाँ तो वो हँसते ज़रूर हैं बच्चों को रोते रोते हँसाती हैं टॉफ़ियाँ 'आदिल' हैं हम भी ज़ाइक़े से उन के बा-ख़बर पानी हमारे मुँह में भी लाती हैं टॉफ़ियाँ
Aadil Aseer Dehlvi
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ख़ुदा की ये बातें ख़ुदा जानता है निकलता है मशरिक़ से किस तरह सूरज फ़लक पर चमकता है ये चाँद क्यूँँकर कहाँ से समुंदर में आते हैं तूफ़ाँ उजाला है कैसा ये शम्स-ओ-क़मर पर ख़ुदा की ये बातें ख़ुदा जानता है बहारों का गुल को पता किस तरह है अदा ग़ुंचों को ये चटकने की क्यूँ दी कहाँ से है आया ख़िज़ाँ का ये मौसम घटा को ये ख़ूबी बरसने की क्यूँ दी ख़ुदा की ये बातें ख़ुदा जानता है
Aadil Aseer Dehlvi
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