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"क्रिसमस" आया है त्यौहार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस मैं लाया हूँ प्यारे तोहफ़े देखो कितने सारे तोहफ़े गुड़िया कैसी आली लाया गुड्डा दाढ़ी वाला लाया जिस के पास हों पैसे ले लो जी चाहे तो वैसे ले लो तोहफ़े पा कर सब बोलेंगे आए यूँँ हर बार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस रंगीले ग़ुब्बारे ले लो गोया चाँद सितारे ले लो चलती फिरती मोटर ले लो ढोल बजाता बंदर ले लो देखो आ कर ख़ूब तमाशा आओ जाने आओ 'पाशा' अगले साल मैं फिर आउँगा जब आएगा यार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस

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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

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तुम हमारे लिए तुम हमारे लिए अर्चना बन गई हम तुम्हारे लिए एक दर्पण प्रिये तुम मिलो तो सही हाल पूछो मेरा हम न रो दें तो कह देना पत्थर प्रिये प्यार मिलना नहीं था अगर भाग्य में देवताओं ने हम सेे ये छल क्यूँ किया मेरे दिल में भरी रेत ही रेत थी दे के अमृत ये हम को विकल क्यूँ किया अप्सरा हो तो हो पर हमारे लिए तुम ही सुंदर सुकोमल सुघर हो प्रिये देवताओं के गणितीय संसार में ऐसा भी है नहीं कोई अच्छा न था हम अगर इस जनम भी नहीं मिल सके सब कहेंगे यही प्यार सच्चा न था कायरों को कभी प्यार मिलता नहीं फ़ैसला कोई ले लो कि डटकर प्रिये मम्मी कहती थीं चंदा बहुत दूर है चाँद से आगे हम को सितारा लगा यूँँ तो चेहरे ही चेहरे थे दुनिया में पर एक तेरा ही चेहरा पियारा लगा पलकों पे मेरी रख कर क़दम तुम चलो पॉंव में चुभ न जाए कि कंकड़ प्रिये

Rakesh Mahadiuree

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''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए

Amir Ameer

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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है

Ali Zaryoun

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"ख़त" तुम को ये बताना था या फिर ये समझाना था दिल की बस ये चाहत थी बस तुम पर प्यार लुटाना था तुम को ये बताना था था छेड़ना तुम को थोड़ा थोड़ा तुम्हें सताना था जो रूठ जाते तुम मुझ सेे हाँ मुझ को तुम्हें मनाना था फिर तुम को गले लगाना था तुम को ये बताना था लड़ के भी तुम सोते तो तुम्हारा सिर सहलाना था मक़्सद सिर्फ़ एक था तुम्हारा प्यार कमाना था सारी दुनिया मिट्टी है तुम्हारा साथ ख़ज़ाना था तुम को ये बताना था मिलने तुम सेे आना था या फिर तुम्हें बुलाना था माँग तुम्हारी भरनी थी अपना तुम्हें बनाना था तुम्हारा ही कहलाना था तुम को ये बताना था इस जीवन का हर मंज़र तुम्हारे साथ बिताना था हर फेरे का हर वा'दा तुम्हारे साथ निभाना था मंगलसूत्र इन हाथों से तुम को ही पहनाना था तुम को ये बताना था फ़ासले जितने भी थे उन को मुझे मिटाना था उस ख़ुदा से हर जन्म में तुम्हारा साथ लिखाना था फिर बारात तुम्हारी चौखट पर तुम सेे ही ब्याह रचाना था तुम को ये बताना था बिन बोले बस चुपके से गजरा तुम्हें दिलाना था बनाता मैं एक दिन खाना फिर खाना तुम्हें खिलाना था तुम्हारे हाथों से खाना मुझ को भी तो खाना था तुम को ये बताना था खो दिया तुम को मैं ने ये दुख अब मुझे मनाना था डूब जाता आसमान बस आँसू मुझे बहाना था फिर लिख दिया मैं ने आँसू बस इतना मेरा फ़साना था तुम को ये बताना था बस तुम को ये बताना था

Divya 'Kumar Sahab'

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दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें मेरे सीने तेरे सपने तेरे सुख-दुख मेरे अपने हर आशा को पाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें ये घर अपना वो घर अपना हीरा अपना कंकर अपना मिल-जुल साथ निभाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें भाई भाई बन के रहना साथ ही मरना साथ ही जीना मन से मन मिल जाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें जो साथी भी छूट गया हो बिन-कारन ही रूठ गया हो उस को भी मनवाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें

Haidar Bayabani

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आया है त्यौहार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस मैं लाया हूँ प्यारे तोहफ़े देखो कितने सारे तोहफ़े गुड़िया कैसी आली लाया गुड्डा दाढ़ी वाला लाया जिस के पास हों पैसे ले लो जी चाहे तो वैसे ले लो तोहफ़े पा कर सब बोलेंगे आए यूँँ हर बार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस रंगीले ग़ुब्बारे ले लो गोया चाँद सितारे ले लो चलती फिरती मोटर ले लो ढोल बजाता बंदर ले लो देखो आ कर ख़ूब तमाशा आओ जाने आओ 'पाशा' अगले साल मैं फिर आउँगा जब आएगा यार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस

Haidar Bayabani

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दादी अम्माँ दादी अम्माँ कितनी सीधी-सादी अम्माँ चाँदी जैसे बालों वाली कितनी अच्छी दादी अम्माँ बातें उन की मिस्री जैसी क़ौल की पक्की दादी अमाँ उजले उजले कपड़े पहने सीधी-सादी दादी अम्माँ दादी अम्माँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ रात गए तक परियों वाले क़िस्से हमें सुनाती हैं गीत सुना कर लोरी गा कर मीठी नींद सुलाती हैं आधी रात गए तक जागते रहने की है आदी अम्माँ दादी अम्माँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ गुड़िया गुड्डे की पोशाकें हम को सी सी कर देती हैं जितने भी हैं पास हमारे सब संदूक़चे भर देती हैं बन कर फिर बच्चों में बच्चा कर देती है शादी अम्माँ दादी अमाँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ अब्बू जब नाराज़ हों हम से वो अब्बू को डाँटती हैं हम बच्चों के हर सुख-दुख को वो हँस हँस के बाँटती हैं जैसे कोई शहर का दादा वैसे घर की दादी अम्माँ दादी अम्माँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ

Haidar Bayabani

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गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना आँखें दिखाए सूरज तन-मन जलाए सूरज पानी हवा हुआ है जंगल जला हुआ है होती है साएँ साएँ ग़ुस्से में हैं हवाएँ उठते हैं यूँँ बगूले जैसे गगन को छू ले तीतर बटेर तोते खाएँ हवा में ग़ोते धरती दहक रही है मिट्टी सुलग रही है गिर जाए जो ज़मीं पर भुन जाए है वो दाना गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना मौसम बदल रहा है इंसाँ पिघल रहा है उतरा गले से मफ़लर मुँह तक रही है चादर तह हो गई रज़ाई ख़ाली है चारपाई कंबल सहज रखी है मलमल गले लगी है पंखों को झल रहे हैं अब फ़ैन चल रहे हैं हीटर से ख़ौफ़ खाएँ कूलर चलाए जाएँ हर शय बदल रही है क्या मर्द क्या ज़नाना गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना आती है याद नानी करते हैं पानी पानी शर्बत का दौर आए क़ुलफ़ी दिलों को भाए तरबूज़ बिक रहे हैं खरबूज़ बिक रहे हैं दूकान कोई खोले बेचे हैं बर्फ़-गोले घर घर में हम ने देखा पीते हैं रूह-अफ़्ज़ा लस्सी का बोल-बाला काफ़ी का मुँह है काला जिस से मिले है ठंडक उस का जहाँ दिवाना गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना

Haidar Bayabani

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खेलने आए दोनों क्रिकेट बंदर हाथी उन के पीछे थे जंगल के सारे साथी कैप्टन था इक टीम का हाथी मस्त क़लंदर दूसरी टीम का कैप्टन बन बैठा था बंदर बंदर ये थे क़िस्मत वाले जीते टॉस फ़ौरन चीते को बुलवाया अपने पास ओपन करने इक जानिब से आया शे'र जोश में आ कर लगाया उस ने रनों का ढेर इक ओवर में बना गया वो सोला रन सत्रह गेंदों में रन उस के सत्तावन इस पारी में धूम धड़का मचा गया वो चाय से पहले डबल सैंचरी बना गया वो देख के अपनी टीम की दुर्गत हाथी चौंका ख़ुद करने बॉलिंग कवर से आया दौड़ा पहली बॉल ही चीते के इस्टम्प को मारा दूसरी बॉल में शे'र ड्रेसिंग रूम सिधारा तीसरी बॉल पे सांभर जी ने कैच दिया चौथी बॉल पे रीछ बेचारा बोल्ड हुआ इक ओवर में चार विकट थे ज़ीरो रन हाथी ने रिकॉर्ड बना डाला ए-वन एक इनिंग में आठ विकट कीपर के कैच नन्हा सा ख़रगोश हुआ मैन ऑफ़ दी मैच दो सौ बीस पे बंदर जी की टीम ऑल आउट पहले रोज़ मछन्दर जी की टीम ऑल आउट दूसरे दिन हाथी के उतरे बल्लेबाज़ बल्लेबाज़ी में लेकिन न थे मुम्ताज़ बंदर जी ने फॉलो-आन की शेख़ी मारी सोचा ख़त्म करेंगे उन की जल्दी पारी हाथी आया दो साथी आउट होने पर वो चकराया अपनी दो विकटें खोने पर हाथी के आने से पारी सँभल गई थी वैसे भी अब पिच की हालत बदल गई थी हाथी आया चौके छक्के मारा ख़ूब बंदर दौड़ा इधर उधर बेचारा ख़ूब तीन सौ तेरह बना के हाथी नॉट आउट था अपने कर्तब दिखा के हाथी नॉट आउट था दो विकटों पे लगा था छे सौ रनों का ढेर फिर पारी डिक्लियर करने में क्या देर दूसरी पारी में बंदर की उड़ी हँसी अस्सी ही रन बना के पूरी टीम गई तीन सौ रन और दस विकटों से मात हुई जीत हुई हाथी की ऊँची बात हुई

Haidar Bayabani

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