"लिस्नर" कभी ख़ामोश रह कर देखना इस ज़िंदगी को तुम तुम्हें औरों के होंटों पर कई रंगों के अफ़्साने मिलेंगे जो सह में सह में से कुछ कहना चाहेंगे मगर तुम बोलना मत उन्हें सुनने की कोशिश करना हो सकता है तुम्हारा बात करने को जी चाहे हो सकता है कि इतनी देर चुप रहने से तुम्हें तो उल्टियाँ होने लगे मगर तुम बे-क़रारी को सँभाले हुए रंगों की ख़ुशबू ओढ़ लेना और उसी दुनिया में खो कर अपना मन आबाद कर लेना ये ख़ामोशी तुम्हारे सामने कई तन्हा से लफ़्ज़ों की रिहाई के दरीचे खोल देगी तुम्हारे पेट की सब तितलियाँ भी उन्हीं बातों को दुनिया मान लेगी जो भी उस कैनवस का हिस्सा होंगी वहाँ से सारे सन्नाटे रवाँ हो कर नए रस्ते की जानिब चल पड़ेंगे जहाँ कोई सियाही से तुम्हारी ज़िंदगी के रंगों को नए आयाम दे कर छोड़ देगा जहाँ उन रंगों की सब परतें खुल जाएँगी वहीं पर उन के होंटों की सहेली सैंकड़ों इशारे कर रही होंगी जहाँ से उस कहानी के सभी किरदार अपनी अदाकारी से बाक़ी सीन को पूरा करेंगे ये सारी बातें तो होती रही हैं सालों से मगर इस बार की सतरें भी धीमी करवटें ले कर तुम्हारे मन पटल पर नया ख़ाका बना कर छोड़ देगी जो शायद यूँँ नहीं था पहले!
Related Nazm
उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........
Varun Anand
475 likes
तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
117 likes
"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है
Ali Zaryoun
70 likes
मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
Sahir Ludhianvi
52 likes
"दरीचा-हा-ए-ख़याल" चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें और ये सब दरीचा-हा-ए-ख़याल जो तुम्हारी ही सम्त खुलते हैं बंद कर दूँ कुछ इस तरह कि यहाँ याद की इक किरन भी आ न सके चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें और ख़ुद भी न याद आऊँ तुम्हें जैसे तुम सिर्फ़ इक कहानी थीं जैसे मैं सिर्फ़ इक फ़साना था
Jaun Elia
27 likes
More from Ajay Kumar
"जंगल" रोज़ शाम आती है और वो बताती है पहले सब मुकम्मल था ये उजाड़ जंगल था जो तमाम पत्थर हैं शोर के वो मंज़र हैं शोर भी मशीनों का पेड़ों का ज़मीनों का और हसरतों का था शोर नफ़रतों का था जो उठा था ग़ारों से उजड़े इन दयारों से एक शोर पल पल था ये उजाड़ जंगल था
Ajay Kumar
2 likes
"तुम्हारी याद आती है मुझे" तुम्हारी याद आती है मुझे हर रोज़ हर पल में नया आगाज़ करने में पुराने ख़त जलाने में नए अश'आर कहने में कोई क़िस्सा सुनाने में तुम्हारी याद आती है मुझे किसी के छोड़ जाने से किसी से दिल लगाने में किसी के रूठ जाने से किसी को अब मनाने में तुम्हारी याद आती है मुझे कोई लम्बा सफ़र हो तो किसी को साथ लाने में कोई घर लौट आए तो गले उस को लगाने में तुम्हारी याद आती है मुझे
Ajay Kumar
3 likes
"लिमिट" कोई आबाद सितारे की कोई हद हो तो वो सितारा किसी तस्वीर में होगा आसमाँ में नहीं हो सकता और उस आसमाँ का कोई भी फ़्रेम नहीं होता होगा भी कैसे? उस के पेंटर ने उसे ऐसे बनाया है जैसे कमरे की कोई छत है जिस पे तारों के डिज़ाइन बने है और वो सारे डिज़ाइन शाम के बा'द नज़र आते है जिन को सब तोड़ने की क़स में भी खाते हैं और वो सारी की सारी क़स में झूठी हैं क्या कोई फूलों के रंगों को मिटा पाया है क्या किसी ख़्वाब ने सच दिखाया है या किसी बे-वफ़ा ने सच्ची मोहब्बत की हो या गुलाबों ने भी इज़हार किया हो आदमी, आदमी से प्यार किया हो या कभी पानी को पानी में डूबते देखा हो और तब पानी में उस सितारे की सभी रातों की हद क्या है? तुम बताओ मिरी इन बातों की हद क्या है? या मिरी बातें भी उन सितारों की तरह ही किसी फ़्रेम का हिस्सा है?
Ajay Kumar
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ajay Kumar.
Similar Moods
More moods that pair well with Ajay Kumar's nazm.







