"तहरीरी" मूरत की तरह अगर मैं खड़ा रहूँ तो न कहना मुझे ये कि मेरी पहचान ही कोई नहीं है बेक़दर मत बन और देख मुझ को ऐ हमनशीं तेरा मुंतज़िर ही हूँ मैं इम्कान है कि दिल पे पहली चोट जो हुई है, वो ज़र्ब आज भी है वो ही ज़र्ब तो मेरी अर्सा-ए-हयात भी है इत्तिफ़ाक़न तू मिली तो ख़ुश-फ़हम सा खड़ा हूँ मैं
Related Nazm
''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए
Amir Ameer
295 likes
"तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे" तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी और ही तरह की आँखें थी तेरे चेहरे पर तू किसी और सितारे से चमक लाई थी तेरी आवाज़ ही सब कुछ थी मुझे मोनिस-ए-जाँ क्या करुँ मैं कि तू बोली ही बहुत कम मुझ सेे तेरी चुप से ही यही महसूस किया था मैं ने जीत जाएगा तेरा ग़म किसी रोज़ मुझ सेे शहर आवाज़ें लगाता था मगर तू चुप थी ये तअल्लुक़ मुझे खाता था मगर तू चुप थी वही अंजाम था जो इश्क़ का आगाज़ से है तुझ को पाया भी नहीं था कि तुझे खोना था चली आती है यही रस्म कई सदियों से यही होता है, यही होगा, यही होना था पूछता रहता था तुझ सेे कि “बता क्या दुख है?” और मेरी आँख में आँसू भी नहीं होते थे मैं ने अंदाज़े लगाए के सबब क्या होगा पर मेरे तीर तराजू भी नहीं होते थे जिस का डर था मुझे मालूम पड़ा लोगों से फिर वो ख़ुश-बख़्त पलट आया तेरी दुनिया में जिस के जाने पे मुझे तू ने जगह दी दिल में मेरी क़िस्मत में ही जब ख़ाली जगह लिखी थी तुझ सेे शिकवा भी अगर करता तो कैसे करता मैं वो सब्ज़ा था जिसे रौंद दिया जाता है मैं वो जंगल था जिसे काट दिया जाता है मैं वो दर्द था जिसे दस्तक की कमी खाती है मैं वो मंज़िल था जहाँ टूटी सड़क जाती है मैं वो घर था जिसे आबाद नहीं करता कोई मैं तो वो था जिसे याद नहीं करता कोई ख़ैर इस बात को तू छोड़, बता कैसी है? तू ने चाहा था जिसे, वो तेरे नज़दीक तो है? कौन से ग़म ने तुझे चाट लिया अंदर से आज कल फिर से तू चुप रहती है, सब ठीक तो है?
Tehzeeb Hafi
180 likes
"याद है पहले रोज़ कहा था" याद है पहले रोज़ कहा था फिर न कहना ग़लती दिल की प्यार समझ के करना लड़की प्यार निभाना होता है फिर पार लगाना होता है याद है पहले रोज़ कहा था साथ चलो तो पूरे सफ़र तक मर जाने की अगली ख़बर तक समझो यार ख़ुदा तक होगा सारा प्यार वफ़ा तक होगा फिर ये बंधन तोड़ न जाना छोड़ गए तो फिर न आना छोड़ दिया जो तेरा नहीं है चला गया जो मेरा नहीं है याद है पहले रोज़ कहा था या तो टूट के प्यार न करना या फिर पीठ पे वार न करना जब नादानी हो जाती है नई कहानी हो जाती है नई कहानी लिख लाऊँगा अगले रोज़ मैं बिक जाऊँगा तेरे गुल जब खिल जाएँगे मुझ को पैसे मिल जाएँगे याद है पहले रोज़ कहा था बिछड़ गए तो मौज उड़ाना वापस मेरे पास न आना जब कोई जा कर वापस आए रोए तड़पे या पछताए मैं फिर उस को मिलता नहीं हूँ साथ दोबारा चलता नहीं हूँ गुम जाता हूँ खो जाता हूँ मैं पत्थर का हो जाता हूँ
Khalil Ur Rehman Qamar
191 likes
"तुम हो" तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो मैं होश में बाहोश में मिरे जिस्म का तुम ख़ून हो तुम सर्द हो बरसात भी मिरी गर्मियों की तुम जून हो तुम ग़ज़ल हो हो तुम शा'इरी मिरी लिखी नज़्म की धुन हो मिरी हँसी भी तुम मिरी ख़ुशी भी तुम मिरे इस हयात की मम्नून हो तुम धूप हो मिरी छाँव भी तुम सियाह रात का मून हो तुम सिन हो तुम काफ़ भी तुम वाओ के बा'द की नून हो तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
ZafarAli Memon
25 likes
"हमेशा देर कर देता हूँ" हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं मदद करनी हो उस की यार की ढारस बँधाना हो बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो किसी को याद रखना हो किसी को भूल जाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
Muneer Niyazi
108 likes
More from Manohar Shimpi
"चिंगारी" आज़ादी के ख़्वाब उन के कैसे रँगते रहे ख़्वाबों में सैलाब जैसे फिर उमड़ते रहे भगत सिंह संग राजगुरु और सुखदेव मुल्क के लिए मिल के ख़ूब लड़ते रहे धागे से धागे ही इस क़दर जुड़ते गए काफ़िले में लोग बहुत सारे बढ़ते रहे एसेंबली में एक छोटी चिंगारी से जैसे माहौल और मौसम के रंग बदलते रहे नारा इंक़िलाब जिंदाबाद देते देते ही फाँसी का फिर तख़्ता वो ही चढ़ते रहे ख़्वाब ये तो देखे नहीं थे उन्होंने भी आज़ादी में छींटे ख़ून के कहीं उड़ते रहे मिल के सभी याद करों क़ुर्बानी उन की मुल्क के वास्ते हो सके अच्छा करते रहे
Manohar Shimpi
1 likes
"यार-दोस्त" यार-दोस्त सफ़र में साथ चलते चले गए जिन्हें जल्दी थी वो बहुत आगे चले गए वक़्त के साथ कोई जहाँ थे वहाँ बस गए वाक़ि'आ और कुछ चेहरे दिल में रह गए कारवाँ दोस्तों का फिर थोड़ा घटता गया तन्हाइयों का रह के आलम शुरू हो गया कोई कसक बचपन की थी बाक़ी रह गई बिछड़ के न मिलने की छोटी सी भूल हो गई रुक रुक के चले तो मकाँ सारे याद आ गए दोस्तों खेलकूद के हसीं वो ज़माने याद आ गए
Manohar Shimpi
1 likes
ख़लिश वो ख़्वाब भी टूटे जिन को अब तक रखा था ज़िंदा अगर अहद-ए-वफ़ा भी न हो तो क्यूँँ फिर हों हम शर्मिंदा इश्क़ मुहब्बत के हम भी रहे हैं बाशिंदे जब कभी हम मिलते थे ख़ूब माज़ी रहा क्या है आइंदा अब सिर्फ़ इक ख़लिश ही तो है सच होंगे क्या पैमान जो थे पाइंदा
Manohar Shimpi
1 likes
"संग तराश" संग तराश अब तक कई देखे ना तुझ सा फनकार देखा कोई जो सनम इस तरह तराशे जैसे जीती जागती लगे मूरत भी ख़ुद-साख़्ता तसव्वर को भी जो कर दे अपने फन से ज़िन्दा कौनसे नगर से है अजब ये बाशिंदा देखके सभी कहें ख़ुदा का है ये बंदा देखते हाल ए दिल बयाँ यूँँ होता जैसे मूरत भी लगे आज़ुर्दा-जमाल ख़ुदा के मानिंद है तेरा ये कमाल जैसे हो संग तराशी की इक मिसाल
Manohar Shimpi
1 likes
आसमानी पर हरे भरे शजर वो और कुछ बंदर हैं बाग़ में इक शाम क्या ख़ूब मंज़र है सुर्ख़ पौधों को निहारते हुए बैठी है फूलों को छूते हुए लगे वो रूठी है शाख़ दर शाख़ बाग़ ख़ूब महकता है तितलियों सी रंगीन वो भी लगती है पर उस के शायद अब खुल गए हैं सरगिरानी भरे हालात बदल गए हैं एहसास होता है अभी ये मुझ को भी आसमानी पर जैसे उसे मिल गए हैं
Manohar Shimpi
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Manohar Shimpi.
Similar Moods
More moods that pair well with Manohar Shimpi's nazm.







