nazmKuch Alfaaz

लहरा तिरंगे लहरा हवा में भर दे रंग-ओ-नूर फ़ज़ा में प्यारे तिरंगे तेरी लाली ख़ून-ए-शहीदाँ की है सुर्ख़ी आज़ादी की एक निशानी आज़ादी है जान वतन की लहरा तिरंगे लहरा हवा में भर दे रंग-ओ-नूर फ़ज़ा में प्यारे तिरंगे तेरी सफ़ेदी एक अलामत अम्न-ओ-अमाँ की अम्न-ओ-अमाँ है बस्ती बस्ती क़स्बा क़स्बा नगरी नगरी लहरा तिरंगे लहरा हवा में भर दे रंग-ओ-नूर फ़ज़ा में प्यारे तिरंगे तेरा हरा-पन सहरा सहरा गुलशन गुलशन दाना दाना ख़िरमन ख़िरमन खेत बना है तुझ से हर बन लहरा तिरंगे लहरा हवा में भर दे रंग-ओ-नूर फ़ज़ा में प्यारे तराने तेरा चक्कर इंसाँ की मंज़िल का रहबर सच्चाई और धर्म का मज़हर चाँद सितारे सदक़े तुझ पर लहरा तिरंगे लहरा हवा में भर दे रंग-ओ-नूर फ़ज़ा में

Related Nazm

''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए

Amir Ameer

295 likes

"हम मिलेंगे कहीं" हम मिलेंगे कहीं अजनबी शहर की ख़्वाब होती हुई शाहराओं पे और शाहराओं पे फैली हुई धूप में एक दिन हम कहीं साथ होगे वक़्त की आँधियों से अटी साहतों पर से मिट्टी हटाते हुए एक ही जैसे आँसू बहाते हुए हम मिलेंगे घने जंगलो की हरी घास पर और किसी शाख़-ए-नाज़ुक पर पड़ते हुए बोझ की दास्तानों में खो जाएँगे हम सनोबर के पेड़ों की नोकीले पत्तों से सदियों से सोए हुए देवताओं की आँखें चभो जाएँगे हम मिलेंगे कहीं बर्फ़ के बाजुओं में घिरे पर्वतों पर बाँझ क़ब्रो में लेटे हुए कोह पेमाओं की याद में नज़्म कहते हुए जो पहाड़ों की औलाद थे, और उन्हें वक़्त आने पर माँ बाप ने अपनी आग़ोश में ले लिया हम मिलेंगे कही शाह सुलेमान के उर्स में हौज़ की सीढियों पर वज़ू करने वालो के शफ़्फ़ाफ़ चेहरों के आगे संगेमरमर से आरस्ता फ़र्श पर पैर रखते हुए आह भरते हुए और दरख़्तों को मन्नत के धागो से आज़ाद करते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं नार मेंडी के साहिल पे आते हुए अपने गुम गश्तरश्तो की ख़ाक-ए-सफ़र से अटी वर्दियों के निशाँ देख कर मराकिस से पलटे हुए एक जर्नेल की आख़िरी बात पर मुस्कुराते हुए इक जहाँ जंग की चोट खाते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं रूस की दास्ताओं की झूठी कहानी पे आँखों में हैरत सजाए हुए, शाम लेबनान बेरूत की नरगिसी चश्मूरों की आमद के नोहू पे हँसते हुए, ख़ूनी कज़ियो से मफ़लूह जलबानियाँ के पहाड़ी इलाक़ों में मेहमान बन कर मिलेंगे हम मिलेंगे एक मुर्दा ज़माने की ख़ुश रंग तहज़ीब में ज़स्ब होने के इमकान में इक पुरानी इमारत के पहलू में उजड़े हुए लाँन में और अपने असीरों की राह देखते पाँच सदियों से वीरान ज़िंदान में हम मिलेंगे तमन्नाओं की छतरियों के तले, ख़्वाहिशों की हवाओं के बेबाक बोसो से छलनी बदन सौंपने के लिए रास्तों को हम मिलेंगे ज़मीं से नमूदार होते हुए आठवें बर्रे आज़म में उड़ते हुए कालीन पर हम मिलेंगे किसी बार में अपनी बकाया बची उम्र की पायमाली के जाम हाथ में लेंगे और एक ही घूंट में हम ये सैयाल अंदर उतारेंगे और होश आने तलक गीत गायेंगे बचपन के क़िस्से सुनाता हुआ गीत जो आज भी हम को अज़बर है बेड़ी बे बेड़ी तू ठिलदी तपईये पते पार क्या है पते पार क्या है? हम मिलेंगे बाग़ में, गाँव में, धूप में, छाँव में, रेत में, दश्त में, शहर में, मस्जिदों में, कलीसो में, मंदिर में, मेहराब में, चर्च में, मूसलाधार बारिश में, बाज़ार में, ख़्वाब में, आग में, गहरे पानी में, गलियों में, जंगल में और आसमानों में कोनो मकाँ से परे गैर आबद सैयाराए आरज़ू में सदियों से ख़ाली पड़ी बेंच पर जहाँ मौत भी हम से दस्तो गरेबाँ होगी, तो बस एक दो दिन की मेहमान होगी

Tehzeeb Hafi

236 likes

"रम्ज़" तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया है मुझ पर इन में इक रम्ज़ है जिस रम्ज़ का मारा हुआ ज़ेहन मुज़्दा-ए-इशरत-ए-अंजाम नहीं पा सकता ज़िंदगी में कभी आराम नहीं पा सकता

Jaun Elia

216 likes

"हमेशा देर कर देता हूँ" हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं मदद करनी हो उस की यार की ढारस बँधाना हो बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो किसी को याद रखना हो किसी को भूल जाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

Muneer Niyazi

108 likes

"तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे" तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी और ही तरह की आँखें थी तेरे चेहरे पर तू किसी और सितारे से चमक लाई थी तेरी आवाज़ ही सब कुछ थी मुझे मोनिस-ए-जाँ क्या करुँ मैं कि तू बोली ही बहुत कम मुझ सेे तेरी चुप से ही यही महसूस किया था मैं ने जीत जाएगा तेरा ग़म किसी रोज़ मुझ सेे शहर आवाज़ें लगाता था मगर तू चुप थी ये तअल्लुक़ मुझे खाता था मगर तू चुप थी वही अंजाम था जो इश्क़ का आगाज़ से है तुझ को पाया भी नहीं था कि तुझे खोना था चली आती है यही रस्म कई सदियों से यही होता है, यही होगा, यही होना था पूछता रहता था तुझ सेे कि “बता क्या दुख है?” और मेरी आँख में आँसू भी नहीं होते थे मैं ने अंदाज़े लगाए के सबब क्या होगा पर मेरे तीर तराजू भी नहीं होते थे जिस का डर था मुझे मालूम पड़ा लोगों से फिर वो ख़ुश-बख़्त पलट आया तेरी दुनिया में जिस के जाने पे मुझे तू ने जगह दी दिल में मेरी क़िस्मत में ही जब ख़ाली जगह लिखी थी तुझ सेे शिकवा भी अगर करता तो कैसे करता मैं वो सब्ज़ा था जिसे रौंद दिया जाता है मैं वो जंगल था जिसे काट दिया जाता है मैं वो दर्द था जिसे दस्तक की कमी खाती है मैं वो मंज़िल था जहाँ टूटी सड़क जाती है मैं वो घर था जिसे आबाद नहीं करता कोई मैं तो वो था जिसे याद नहीं करता कोई ख़ैर इस बात को तू छोड़, बता कैसी है? तू ने चाहा था जिसे, वो तेरे नज़दीक तो है? कौन से ग़म ने तुझे चाट लिया अंदर से आज कल फिर से तू चुप रहती है, सब ठीक तो है?

Tehzeeb Hafi

180 likes

More from Saadat Nazeer

टूटीं ज़ुल्म की क़ैदें टूटीं फूटीं अम्न की किरनें फूटीं लूटीं दिल ने ख़ुशियाँ लूटीं तारे सोए सूरज जागा भागा घोर अँधेरा भागा सख़्त घड़ी जो थी बीत गई है हारी बाज़ी जीत गई है ख़ाक में ग़म की रीत गई है तारे सोए सूरज जागा भागा घोर अँधेरा भागा आए ख़ुशी के दिन यूँँ वतन में फूलों की रुत जैसे चमन में सोती उमंगें जागीं मन में तारे सोए सूरज जागा भागा घोर अँधेरा भागा गहरी नींद से जागी दुनिया जागी गंगा जागी जमुना धरती पर लहराया फरेरा तारे सोए सूरज जागा भागा घोर अँधेरा भागा जागे गिरजा मस्जिद मंदिर खेत चमन मिल मकतब दफ़्तर रौशन हैं सब छोटे बड़े घर तारे सोए सूरज जागा भागा घोर अँधेरा भागा बिछड़े साथी मिलने लगे हैं चाक जिगर के सिलने लगे हैं दिल के ग़ुंचे खिलने लगे हैं तारे सोए सूरज जागा भागा घोर अँधेरा भागा

Saadat Nazeer

0 likes

उट्ठो क़दम क़दम से मिलाते चले चलो सब मिल के एक राह बनाते चले चलो मंज़िल की धुन में झूमते गाते चले चलो हर मरहले को सहल बनाते चले चलो बन कर घटा फ़ज़ाओं पे छाते चले चलो हर हर क़दम पे धूम मचाते चले चलो तफ़रीक़-ए-रंग-ओ-नस्ल मिटाते चले चलो इंसानियत की शान दिखाते चले चलो आगे बढ़ो रुको न किसी रहगुज़ार पर हर दम सफ़र का लुत्फ़ उठाते चले चलो मायूसियों में छेड़ दो नग़्में उमीद के तारीकियों में जोत जगाते चले चलो टूटे हुए दिलों को मोहब्बत से जोड़ दो जौहर अमल के अपने दिखाते चले चलो धरती भी जगमगा उठे आकास की तरह रातों में वो चराग़ जलाते चले चलो चमको गगन के तारों की सूरत ज़मीन पर तुम आसमाँ ज़मीं को बनाते चले चलो पतझड़ की रुत में फूल खिलाना कमाल है पतझड़ की रुत में फूल खिलाते चले चलो बदले ख़िज़ाँ 'नज़ीर' चमन में बहार से वो गीत ज़िंदगी के सुनाते चले चलो

Saadat Nazeer

0 likes

हम से ही फूलों की फबन है हम से ही शादाब चमन है जोश-ओ-ख़रोश-ए-गंग-ओ-जमन है शान-ए-वतन है हुस्न-ए-वतन है हम क्या हैं तक़दीर-ए-वतन हैं मसरूफ़-ए-ता'मीर-ए-वतन हैं अज़मत-ए-माज़ी रिफ़अत-ए-फ़र्दा रौनक़-ए-महफ़िल ज़ीनत-ए-दुनिया शाम का मंज़र सुब्ह का जल्वा गुलशन गुलशन सहरा सहरा गुल ये खिले हैं फ़िक्र-ओ-नज़र के सींचा है हम ने ख़ून-ए-जिगर से मस्जिद मंदिर दैर कलीसा ताज महल एलोरा अजंता जंतर-मंतर क़ुत्ब मिनारा कभी अँधेरा कभी उजाला हम से ही तारीख़-ए-वतन है बाक़ी हर इक नक़्श-ए-कुहन है जोश-ए-अमल है दिल में हमारे सर्द फ़ज़ा में हम हैं शरारे तोड़ के लाएँ चर्ख़ से तारे रोकें तूफ़ाँ मोड़ दें धारे हो हो कर बलवान बढ़ेंगे जग में हम परवान चढ़ेंगे सख़्त मराहिल राह में आएँ लाख हवादिस आँख दिखाएँ हाइल अगर हों तुंद हवाएँ वो भी हम से मुँह की खाएँ आँधी बन कर तेज़ चलेंगे और मंज़िल पर जा के रहेंगे

Saadat Nazeer

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Saadat Nazeer.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Saadat Nazeer's nazm.