आ गए? आइए! बैठिये! आप आख़िर थे तो थे कहाँ
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे?
Zubair Ali Tabish
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
Jaun Elia
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रुक गया दरिया समुन्दर बह गया और फिर आख़िर हिमालय ढह गया
nakul kumar
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वो जो उस की आँखें हैं मुसलसल किताबें हैं
Mohsin Ahmad Khan
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ये मिसरा तेरी मेरी उस मोहब्बत की वज़ाहत है तुझे मुझ से मोहब्बत थी मुझे तुझ से मोहब्बत है
Mohsin Ahmad Khan
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उम्र ज़ाया' की जिस को पाने में रफ़्ता रफ़्ता उसे भुलाना है
Mohsin Ahmad Khan
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तुम को मर जाने की तमन्ना थी जाओ तुम को दी ज़िंदगी हम ने
Mohsin Ahmad Khan
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है दर पर कोई, देख लो, देख लो तुम? कहाँ जा रहे हो, कहाँ गुम हो तुम भी
Mohsin Ahmad Khan
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