आ जाए कौन कब कहाँ कैसी ख़बर के साथ अपने ही घर में बैठा हुआ हूँ मैं डर के साथ
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बे-दिली क्या यूँँही दिन गुज़र जाएँगे सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे
Jaun Elia
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?
Umair Najmi
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इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
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काश वो रास्ते में मिल जाए मुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है
Fahmi Badayuni
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जो बुजुर्गों की दु'आओं के दीयों से रौशन रोज़ उस घर में दीवाली का जश्न होता है
Pratap Somvanshi
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ज़ेहनियत को साफ़ रखना सीखिए लड़कियाँ यूँँ भी तो हँसती-बोलती हैं
Pratap Somvanshi
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सफ़र में जब निकल आए हो तो इतनी शिकायत क्यूँ सड़क थोड़ी बहुत तो बीच में तिरछी निकलती है
Pratap Somvanshi
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लक्ष्मण-रेखा भी आख़िर क्या कर लेगी सारे रावण घर के अंदर निकलेंगे
Pratap Somvanshi
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राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था
Pratap Somvanshi
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