सफ़र में जब निकल आए हो तो इतनी शिकायत क्यूँ सड़क थोड़ी बहुत तो बीच में तिरछी निकलती है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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जो बुजुर्गों की दु'आओं के दीयों से रौशन रोज़ उस घर में दीवाली का जश्न होता है
Pratap Somvanshi
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ज़ेहनियत को साफ़ रखना सीखिए लड़कियाँ यूँँ भी तो हँसती-बोलती हैं
Pratap Somvanshi
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आ जाए कौन कब कहाँ कैसी ख़बर के साथ अपने ही घर में बैठा हुआ हूँ मैं डर के साथ
Pratap Somvanshi
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राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था
Pratap Somvanshi
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लक्ष्मण-रेखा भी आख़िर क्या कर लेगी सारे रावण घर के अंदर निकलेंगे
Pratap Somvanshi
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