आ जाएगा लौट के वो इक रोज़ कहीं हम ने भी रातों को जगकर देखा है
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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उस के पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं
Jaun Elia
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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तेरे ख़ातिर ज़िंदगानी इक काम ज़रूरी है पत्थर डूब के उछले ऐसा नाम ज़रूरी है मुझ को करनी है मन मानी अपनी ख़ूबी पर दोस्त ख़ुदा तक जाना ये पैग़ाम ज़रूरी है
Manish watan
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जिस दिन ये ग़म समझेगा मेरे दुख का मतलब उस दिन ही ये मर जाएगा यार बिचारा दुख
Manish watan
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आ जाएगा लौट के वो इक रोज़ कहीं हम ने भी रातों को जगकर देखा है
Manish watan
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वो आईना भी हम सेे अब बोला है जो पहले उल्टा सीधा सब बोला है मैं बरसों से क़ैदी हूँ अपने दिल में तुझ को थोड़ा घाव मिला तब बोला है
Manish watan
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दोस्त सफ़र में दम घुटने लग जाए तो फिर रस्ते में पेड़ उगाना पड़ता है कौन सुनेगा चुप की भाषा दोस्त यहाँ दिल टूटे तो शोर मचाना पड़ता है
Manish watan
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