जिस दिन ये ग़म समझेगा मेरे दुख का मतलब उस दिन ही ये मर जाएगा यार बिचारा दुख
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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वो आईना भी हम सेे अब बोला है जो पहले उल्टा सीधा सब बोला है मैं बरसों से क़ैदी हूँ अपने दिल में तुझ को थोड़ा घाव मिला तब बोला है
Manish watan
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तेरे ख़ातिर ज़िंदगानी इक काम ज़रूरी है पत्थर डूब के उछले ऐसा नाम ज़रूरी है मुझ को करनी है मन मानी अपनी ख़ूबी पर दोस्त ख़ुदा तक जाना ये पैग़ाम ज़रूरी है
Manish watan
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सभी ज़ख़्म मुरझा गए हैं हमारे कभी भी किसी में खिलेंगे नहीं हम बता कर गया है खुले ज़ख़्म रखना कभी ज़ख़्म अपने सिलेंगे नहीं हम
Manish watan
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भूल गए मुख से अंदाज़ा लगाना सब अब लोगों को ज़ख़्म दिखाना पड़ता है
Manish watan
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आ जाएगा लौट के वो इक रोज़ कहीं हम ने भी रातों को जगकर देखा है
Manish watan
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