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भूल गए मुख से अंदाज़ा लगाना सब अब लोगों को ज़ख़्म दिखाना पड़ता है

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वो आईना भी हम सेे अब बोला है जो पहले उल्टा सीधा सब बोला है मैं बरसों से क़ैदी हूँ अपने दिल में तुझ को थोड़ा घाव मिला तब बोला है

Manish watan

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सभी ज़ख़्म मुरझा गए हैं हमारे कभी भी किसी में खिलेंगे नहीं हम बता कर गया है खुले ज़ख़्म रखना कभी ज़ख़्म अपने सिलेंगे नहीं हम

Manish watan

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तेरे ख़ातिर ज़िंदगानी इक काम ज़रूरी है पत्थर डूब के उछले ऐसा नाम ज़रूरी है मुझ को करनी है मन मानी अपनी ख़ूबी पर दोस्त ख़ुदा तक जाना ये पैग़ाम ज़रूरी है

Manish watan

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दोस्त सफ़र में दम घुटने लग जाए तो फिर रस्ते में पेड़ उगाना पड़ता है कौन सुनेगा चुप की भाषा दोस्त यहाँ दिल टूटे तो शोर मचाना पड़ता है

Manish watan

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जिस दिन ये ग़म समझेगा मेरे दुख का मतलब उस दिन ही ये मर जाएगा यार बिचारा दुख

Manish watan

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