सभी ज़ख़्म मुरझा गए हैं हमारे कभी भी किसी में खिलेंगे नहीं हम बता कर गया है खुले ज़ख़्म रखना कभी ज़ख़्म अपने सिलेंगे नहीं हम
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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वो आईना भी हम सेे अब बोला है जो पहले उल्टा सीधा सब बोला है मैं बरसों से क़ैदी हूँ अपने दिल में तुझ को थोड़ा घाव मिला तब बोला है
Manish watan
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आ जाएगा लौट के वो इक रोज़ कहीं हम ने भी रातों को जगकर देखा है
Manish watan
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आ जाएगा लौट के वो इक रोज़ कहीं हम ने भी रातों को जगकर देखा है
Manish watan
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जिस दिन ये ग़म समझेगा मेरे दुख का मतलब उस दिन ही ये मर जाएगा यार बिचारा दुख
Manish watan
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कुछ पाने के लिए निकला हूँ अब मैं देखूॅंगा खोना क्या होगा मुझ को
Manish watan
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