आ रही है हिज़्र की बू आप की परछाईं से आप को तो वस्ल की ख़ुशबू लगानी चाहिए
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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चाँद ने ओढ़ ली है चादर-ए-अब्र अब वो कपड़े बदल रही होगी
Jaun Elia
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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ये किस ने बाग़ से उस शख़्स को बुला लिया है परिंद उड़ गए पेड़ों ने मुँह बना लिया है उसे पता था मैं छूने में वक़्त लेता हूँ सो उस ने वस्ल का दौरानिया बढ़ा लिया है
Tehzeeb Hafi
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वक़्त लगेगा हम दोनों को लेकिन अच्छे हो जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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तुम काजल हो मैं काजल की डिबिया हूँ हम दोनों इक साथ ख़रीदे जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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मैं इस लिए भी मोहब्बत न कर सका तुम सेे तुम्हारा इश्क़ मेरा रिज़्क़ छीन सकता था
Shamsul Hasan ShamS
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जो उस के साथ बाँधी थी रिवायत तोड़ दी मैं ने जो वो पूछे तो कह देना मोहब्बत छोड़ दी मैं ने
Shamsul Hasan ShamS
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सुकूँ से जी रहा हूँ हिज्र के दिन तुम्हारी बद-दुआ को सात बोसे
Shamsul Hasan ShamS
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