आदतन तुम अपनी बातों से फिरोगे था पता दिल है दिल का क्या करें बस इश्क़ की तामील की
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मैं कहता था मगर तू ने न मानी पर अब तेरा भी दिल भर ही गया ना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो जो ख़ुद इक गुलाब है यारो आज उस को गुलाब देना है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़िंदगी से जंग चाहे ज़िंदगी भर ही चले जीते जी तो मेरी जाँ अब हार मानेंगे नहीं मुस्कुरा कर ही सहेंगे चाहे जितना दर्द हो मुस्कुराने से कदाचित् रार ठानेंगे नहीं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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रहते हैं अपने आप से कुछ बे-ख़बर से हम जब से हुए हैं रू-ब-रू दर्द-ए-जिगर से हम
Ajeetendra Aazi Tamaam
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