आधा दिल है और आधा रूमाल तेरे सीने पे रक्खा रूमाल जिस ने नम की आँख मेरी उस को मैं ने तोहफ़े में भेजा रूमाल
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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आज तो दिल के दर्द पर हँस कर दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है जैसे सर से बला उतारी है
Viru Panwar Viyogi
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तुम्हारा ग़म हमारे काम आने लग गया है हमारा शाइरों में नाम आने लग गया है वो अब रखने लगी है लब किसी और के लबों पर हमारे होंठों तक भी जाम आने लग गया है
Viru Panwar Viyogi
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तुम्हारे रास्तों को छोड़ कर अगर हम ने किसी गली में कभी ख़ाक उड़ाई तो कहना हमारे इश्क़ को दो दिन का खेल कहते हो तमाम उम्र न तन्हा बिताई तो कहना
Viru Panwar Viyogi
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ये अलग बात है हरे नहीं हैं ज़ख़्म लेकिन अभी भरे नहीं हैं
Viru Panwar Viyogi
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फूल जैसे हसीन चेहरे से ज़ख़्म खाए तो शेर कहने लगे उस से बिछड़े तो रो न पाए हम रो न पाए तो शेर कहने लगे
Viru Panwar Viyogi
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