आदमी की नस्ल को हम दूर से पहचानते हैं हाथ किस का है कहाँ पे यार हम सब जानते हैं
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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कहानी तुम्हारी है हीरो हो तुम कहाँ कह रहे हम कि ज़ीरो हो तुम
Shubham Rai 'shubh'
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साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
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मोहब्बत से निकलना जो कभी तो देखना तुम किताब-ए-ज़ीस्त के पन्नों में लिक्खा क्या गया था
Shubham Rai 'shubh'
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करूँँगा मैं क्या अब बताता नहीं हूँ सो अब पीठ पर ज़ख़्म खाता नहीं हूँ सभी लूट जाए भले आज कल पर किसी दर पे मैं सर झुकाता नहीं हूँ
Shubham Rai 'shubh'
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जैसे क़िस्मत आज़माना होता है उस तरह अब दिल लगाना होता है ये खुले गेसू नशीली आँखें बस और क्या दिल हार जाना होता है
Shubham Rai 'shubh'
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