आदमी को ज़ी-हशम झूठा भी होना चाहिए सिर्फ़ अच्छा होना ही काफ़ी नहीं है इश्क़ में
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मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
Dushyant Kumar
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
Tehzeeb Hafi
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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उस को होता है हर इक रोज़ नए शख़्स से इश्क़ उस के इस शौक़ पे अब ख़ाक है हैराँ होना
A R Sahil "Aleeg"
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रहम करो निजी मुआमला का रंग तो न दो जो शे'र हैं फ़क़त वो शे'र ही हैं और कुछ नहीं
A R Sahil "Aleeg"
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रहे क़ाएम-ओ-दाइम अहद-ओ-पैमाँ पर कहाँ मिलते हैं ऐसे नस्ल-ए-आदम अब
A R Sahil "Aleeg"
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कभी इक बार ख़ुद को आज़मा कर देख लेना तुम यक़ीं जानो किसी को आज़माना भूल जाओगे
A R Sahil "Aleeg"
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क़फ़स से इश्क़ है जिन को अलग वो रह नहीं सकते मगर फिर भी परिंदों को उड़ा कर देख लेता हूँ
A R Sahil "Aleeg"
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